दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में बड़ी राहत दी। अदालत ने सभी 22 आरोपियों को आरोपों से मुक्त किया। इनमें बीआरएस नेता के कविता भी शामिल रहीं। अदालत ने साफ कहा कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को ठोस सबूतों से साबित नहीं कर सका। जज ने कहा कि नीति में किसी बड़ी साजिश या आपराधिक मंशा का प्रमाण नहीं मिला।
विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने आदेश सुनाया। उन्होंने कहा कि गंभीर आरोपों के लिए ठोस सामग्री जरूरी होती है। उन्होंने पाया कि जांच एजेंसी किसी केंद्रीय साजिश की कहानी को प्रमाणित नहीं कर सकी। उन्होंने यह भी कहा कि कमजोर आरोप सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित करते हैं। इसलिए उन्होंने किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप तय नहीं किए।
अदालत ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। जज ने पूछा कि कुछ बयान और राय केस डायरी में क्यों शामिल नहीं किए गए। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि तीन कानूनी विशेषज्ञों की राय को एजेंसी ने अपने पक्ष में कैसे पेश किया। अदालत ने “साउथ ग्रुप” शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। जज ने कहा कि रिकॉर्ड में इस शब्द की स्पष्ट परिभाषा और ठोस आधार नहीं दिखता।
इस मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई। दिल्ली सरकार ने 2021-22 की आबकारी नीति लागू की थी। बाद में दिल्ली के मुख्य सचिव की रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया। इसके बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया कि नीति से कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। एजेंसियों ने दावा किया कि कथित लॉबी ने 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी।
सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को नीति का मुख्य सूत्रधार बताया। एजेंसी ने उन्हें फरवरी 2023 में गिरफ्तार किया। उन्होंने करीब 17 महीने जेल में बिताए। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी। इसके बाद सीबीआई ने मार्च 2024 में अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया। उस समय वे मुख्यमंत्री पद पर थे। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2024 में उन्हें भी जमानत दी।
अदालत ने दस्तावेजों और फाइलों की समीक्षा की। जज ने कहा कि रिकॉर्ड प्रशासनिक विचार-विमर्श को दिखाता है, न कि आपराधिक साजिश को। उन्होंने कहा कि अभियोजन की कहानी में कई आंतरिक विरोधाभास दिखते हैं। इसलिए अदालत ने पूरी थ्योरी को खारिज कर दिया।
फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल मीडिया के सामने आए। वे भावुक दिखे। उन्होंने कहा कि सच की जीत हुई। उन्होंने अदालत का आभार जताया। उन्होंने इस केस को स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधियों ने आम आदमी पार्टी को खत्म करने के लिए यह मामला खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए संविधान से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।
यह मामला राजनीतिक रूप से भी अहम रहा। गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया। बाद के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। फरवरी 2025 के चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला। विश्लेषकों ने माना कि इस विवाद ने आप की छवि को नुकसान पहुंचाया।
अब अदालत के फैसले के बाद कानूनी लड़ाई का यह अध्याय खत्म होता दिख रहा है। हालांकि राजनीतिक बहस अभी जारी रहने के संकेत मिलते हैं।