जीएसटी को लेकर छत्तीसगढ़ और केंद्र आमने-सामने

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रायपुर, 02 सितंबर (हि.स.)। वस्तु एवं सेवा कर क्षतिपूर्ति को लेकर छत्तीसगढ़ एवं केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। राज्य के वाणिज्य कर मंत्री टीएस सिंह देव ने जहां केंद्र पर राज्य का राजस्व लेने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा है कि मुख्यमंत्री संघीय ढांचे का अपमान कर रहे हैं।

 छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार की उस सलाह को ठुकरा दिया है जिसमें कर्ज लेकर नुकसान की भरपाई करने का विकल्प दिया गया है। मंगलवार को केंद्रीय वित्त सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के वित्त सचिव से बात की। राज्य के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने बताया कि हमने इस मामले में अपनी शंकाएं रखी है और जीएसटी कलेक्शन तथा क्षतिपूर्ति से जुड़े आंकड़ों की उन्हें जानकारी दी है।
वाणिज्य कर मंत्री सिंहदेव ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि राज्य के राजस्व को केंद्र ले जा रहा है।छत्तीसगढ़ बनने का आधार यही था कि हमारे संसाधनों से हमारा विकास नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि राज्यों के टैक्स लगाने का अधिकार बना रहना चाहिए। सिंहदेव ने जानकारी दी कि राज्य पहले कोयले पर ₹400 प्रति टन प्रदूषण कर लेता था, जिससे प्रतिवर्ष 57 सौ करोड़ का राजस्व मिलता था। अब यह अधिकार केंद्र ने ले लिया है। अब राज्य को कोयले से सालाना केवल 22 सौ करोड़ मिल पाता है। दूसरे करो को भी सीधे केंद्र ले ले रहा है। हमारी आमदनी रोकने के बाद केंद्र कह रहा है कि आप क्या करोगे ,आप अपना समझ लो। उन्होंने कहा कि कर लगाने का अधिकार छोड़ना राज्यों की बहुत बड़ी गलती थी। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को ही राज्यों द्वारा कर्ज लेने का केंद्र का प्रस्ताव ठुकरा दिया है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव राय ने कहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल केंद्र सरकार के साथ टकराव का रवैया अपना रहे हैं। वे संघीय ढांचे की अवमानना कर रहे हैं। केंद्र के प्रस्ताव को नकार कर वह यह साबित कर रहे थे उन्हें जीएसटी की राशि से खास सरोकार नहीं है।
वहीं संसदीय सचिव विकास उपाध्याय का कहना है कि भाजपा नेताओं को आज संघीय ढांचे की याद क्यों आ रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के जीएसटी कानून के तहत राज्यों को 5 साल तक राजस्व में होने वाले नुकसान के बदले मुआवजा देने का प्रावधान है। फिर वह अपने ही कानून का पालन क्यों नहीं कर रही।

 


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