राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का पहला कोरोना संक्रमित रोहित दत्ता स्वस्थ्य होकर जी रहा है खुशहाल जिंदगी

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नोएडा, 24 मई (हि.स.)। भारत के साथ-साथ पूरा विश्व कोरोना महामारी से लड़ रहा है। इस महामारी से लाखों लोग संक्रमित हुए तो लाखों लोग ठीक भी हो गए हैं। उन्हें कोरोना वॉरियर्स कहा जाता है। ऐसे ही एक कोरोना वॉरियर्स हैं रोहित दत्ता। 45 वर्षीय दत्ता अपना व्यापार चलाते हैं। वह इसी वर्ष फरवरी माह में अपने व्यापार के सिलसिले में यूरोप गए थे जब वह भारत वापस लौटे तो उनको बुखार जैसा महसूस हुआ। उन्होंने जब जांच कराई तो उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आयी। इसके साथ ही रोहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सबसे पहले कोरोना संक्रमित और कोरोना वॉरियर्स बन जाते हैं।
व्यापार के सिलसिले में गए थे यूरोप, ऑस्ट्रिया में हुए थे संक्रमित
रोहित दत्ता का दिल्ली जयपुर हाईवे में अपना टेक्निकल टेक्सटाइल कारखाना है। वह व्यापार के सिलसिले में फरवरी माह में यूरोप के इटली व ऑस्ट्रिया ट्रिप पर गए थे। उस वक्त पूरे यूरोप में मात्र पचास कोरोना संक्रमित थे। गत 25 फरवरी को रोहित ऑस्ट्रिया से दिल्ली के मयूर विहार फेज 2 स्थित अपने घर वापस आए थे, वहां वह अपने परिवार के साथ रहते हैं। वह बताते हैं कि “25 फरवरी को जब मैं घर आया तो मेरी तबियत बिल्कुल ठीक थी लेकिन उसी रात को मुझे बुखार आने लगा जिसका तापमान 99 डिग्री तक रहता था। दो चार दिन खुद डॉक्टर को दिखाने के बाद 29 फरवरी को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में चेकअप कराने गया था। एक मार्च को मेरी रिपोर्ट आई जो पॉजिटिव थी।”
इटली से आने के बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नहीं हुई थी जांच
रोहित बताते हैं कि जब वह ऑस्ट्रिया से 25 फरवरी को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे थे तो उस समय उनकी जांच या स्क्रीनिंग नहीं हुई थी। क्योंकि उस वक्त यूरोप में कोरोना संक्रमितों की संख्या 50 ही थी। जब वह अपने घर पहुंचे तब रात को उन्हें बुखार आया था।
15 दिन चला था इलाज
रोहित बताते हैं कि 29 फरवरी को जब वो कोरोना की जांच कराने आरएमएल में गए थे तो उन्हें एक मार्च तक वहीं रहना पड़ा। एक मार्च को कोरोना का रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद 14 मार्च तक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया था। वहीं पर 14 दिन के एकांतवास में रहने के दौरान उनका इलाज चला और वो ठीक होकर 15 मार्च को वापस अपने घर आ गए थे।
कैसी थी एकांतवास के दौरान व्यवस्था?
कोरोना वॉरियर्स रोहित ” एकांतवास”  स्थान के बारे में बताते हैं कि वहां पर बहुत बढ़िया व्यवस्था की गयी थी। बिल्कुल नए तरह से सब चीज वहां पर व्यवस्थित थी। खाने पीने का उत्तम इंतजाम, कमरे के साथ अटैच बाथरूम उपलब्ध था। कमरा भी बहुत साफ़ सुथरा था। डॉक्टर नर्स एवं अन्य मेडिकल स्टाफ बहुत ज्यादा सहयोग करते थे। वह बताते हैं कि डॉक्टर एवं नर्श समेत सभी मेडिकल स्टाफ थोड़े से डरे हुए थे, क्योंकि उनको पता नहीं था कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पहले कोरोना संक्रमित के साथ कैसा व्यवहार किया जाए। वे जानते सब कुछ थे कि इलाज कैसे किया जाए, लेकिन परीक्षण पहली बार मेरे साथ ही उनका हो रहा था।
कैसा बीता एकांतवास का समय?
रोहित ने बताया कि 14 दिन मैं बहुत घबराया हुआ था। क्योंकि यह अलग तरह का अनुभव था। जब भी मुझे अधिक घबराहट होती मैं मोबाइल का प्रयोग करता था। अपने परिवार से बात करता था। इसके बाद नेटफ्लिक्स पर वेब सीरीज देखता था।
अब कैसा लग रहा है?
वह बताते हैं कि अब तो मुझे ठीक हुए लगभग तीन महीने हो गए हैं। अब मैं बहुत फिट हूं। मुझे यकीन था भगवान पर जिस वजह से मैं ठीक हो पाया। मेरे परिवार वाले मुझे बहुत प्रेरित करते थे, वह मुझे शक्ति देते थे। लोगों से यही कहूंगा कि अपने परिवार को ज्यादा से ज्यादा समय दीजिए, उनके साथ ज्यादा रहिए।

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