खनन घोटालाः सीबीआई की जांच में फंसा वन विभाग, डीएफओ समेत 6 कर्मियों से पूछताछ

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एमएलसी के बड़े भाई को दोबारा कैम्प कार्यालय में तलब करके लिये गये बयान- मौरंग खनन की जांच में बसपा और सपा सरकार के बड़े अफसर निशाने पर



हमीरपुर, 05 दिसम्बर (हि.स.)। पिछले ग्यारह दिनों से खनन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की पूछताछ में यहां का वन विभाग पूरी तरह फंसता नजर आ रहा है। अब तक डीएफओ समेत 6 कर्मियों से पूछताछ की जा चुकी है। गुरुवार को भी कानपुर देहात में तैनात डीएफओ समेत वन विभाग के कई अधिकारियों व कर्मियों को कैम्प कार्यालय में तलब करके कई घंटे तक पूछताछ करके बयान दर्ज किये गये। सपा के एमएलसी रमेश मिश्रा के भाई मौरंग कारोबारी दिनेश मिश्रा को भी आज दोबारा तलब करके पूछताछ की गयी। सीबीआई की जांच के दायरे में मायावती और अखिलेश सरकार के नीचे से लेकर उच्च स्तर पर तैनात रहे तमाम अधिकारी आ गये हैं।
हमीरपुर स्थित मौदहा बांध निर्माण खंड के निरीक्षण भवन में कैम्प कर रही सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम ने गुरुवार को कानपुर देहात के डीएफओ ललित किशोर गिरि, हमीरपुर वन विभाग के एसडीओ संजय शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार, स्टेनो जगन्नाथ व कम्पाइल बाबू राम सिंह को तलब करके मौरंग खनन के पट्टों के लिये मायावती की सरकार में जारी हुयी एनओसी और अन्य दस्तावेज के बारे में पूछताछ की। करीब ढाई घंटे तक सीबीआई के सवालों के जवाब देने के बाद बाहर निकलने पर इन सभी ने राहत की सांस ली।इसके बाद सीबीआई ने सपा के एमएलसी रमेश मिश्रा के भाई दिनेश मिश्रा को दोबारा तलब करके लम्बी पूछताछ की। वह बड़े स्तर के मौरंग कारोबारी हैं जो मायावती और अखिलेश सरकार में भी लगातार मौरंग खनन के पट्टे चलाते रहे हैं।
इस मामले की हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता विजय द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 2010 में सरीला क्षेत्र के बेंदा, जिटकरी, घुरौैली सहित अन्य मौरंग खनन क्षेत्र में पर्यावरण सम्बन्धी एनओसी वन विभाग ने जारी की थी। मौरंग खनन के पट्टों की एनओसी जारी करने की संस्तुति और रिपोर्ट के सभी अभिलेखों को खंगालने के दौरान सीबीआई के हाथ अवैध खनन के पुख्ता साक्ष्य लगे हैं। वन क्षेत्र सीमा में मौरंग कारोबारियों ने कई एकड़ भूमि पर खनन कर डाला है। वहां के किसानों ने इस मामले की पुष्टि सीबीआई के अधिकारियों के सामने जांच के दौरान की है।
वन विभाग की पर्यावरण सम्बन्धी वर्ष 2010 से 2012 तक 43 मौैरंग खनन के पट्टों के लिये जारी एनओसी और अभिलेखों की जांच में वन विभाग के तत्कालीन डीएफओ, रेंजर, वन दारोगा और अन्य तमाम कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गये हैं जिसे उजागर करने के लिये सीबीआई बार-बार वन अधिकारियों व कर्मियों से पूछताछ कर रही है। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने वर्ष 2010 से लेकर 2016 तक मौरंग खनन के लिये जारी किये गये पट्टों और मौरंग खनन के पट्टों के लिये किये गये आवेदन पत्र और अभिलेखों की भी जांच की गई। इस दौरान ऐसे कई लोगों के नाम सामने आये हैं जिन्होंने मौरंग खनन के पट्टों के लिये आवेदन किया था। उन लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
तीन दिनों से लापता वन कर्मी सीबीआई के सामने हुआ पेश
वन विभाग हमीरपुर में तैनात डिस्पैच लिपिक रामकिशन को सीबीआई ने चार दिन पहले कैम्प कार्यालय तलब किया था लेकिन वह डर के मारे गायब हो गया था। गुरुवार को वह हिम्मत जुटाते हुये सीबीआई के कैम्प कार्यालय पहुंचा जहां सीबीआई ने उसके बयान लिये हैं। यह लिपिक वर्ष 2010 के बाद से डिस्पैच का काम देख रहा है। इससे पहले डिस्पैच लिपिक हबीब बाबू से भी सीबीआई पूछताछ कर चुकी है जो अब रिटायर हो चुके हैं।
सीबीआई के डर से कई मौरंग कारोबारी दूसरे राज्य में करेंगे कारोबार
खनन घोटाले में सीबीआई की एफआईआर में फंसे कई मौरंग कारोबारी हमीरपुर से लापता हो गये हैं। इनके मोबाइल भी काम नहीं कर रहे हैं। कई मौैरंग कारोबारी सीबीआई की जांच के डर से पड़ोसी मध्यप्रदेश में मौैरंग खनन का कारोबार करने की तैयारी में हैं।

 


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