एआई समिट विरोध के बाद दिल्ली–शिमला पुलिस आमने-सामने, देर रात ट्रांजिट रिमांड के बाद खत्म हुआ गतिरोध

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AI समिट में हुए ‘शर्टलेस प्रोटेस्ट’ के बाद दिल्ली और शिमला पुलिस आमने-सामने आ गईं। करीब 24 घंटे चला हाई-वोल्टेज ड्रामा गुरुवार तड़के खत्म हुआ। आखिरकार दिल्ली पुलिस तीनों यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लेकर राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना हुई।

दरअसल, पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान तीन भारतीय युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज किया। वे प्रदर्शनी हॉल में सरकार और भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लिखी टी-शर्ट लेकर घूमे। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उन्हें हॉल से बाहर किया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस टीम हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू पहुंची। बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे टीम ने सौरभ सिंह और अरबाज़ खान (उत्तर प्रदेश) तथा सिद्धार्थ अवधूत (मध्य प्रदेश) को हिरासत में लिया। इसके बाद टीम तीनों को लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुई।

हालांकि, यहीं से विवाद शुरू हुआ। हिमाचल प्रदेश पुलिस को कार्रवाई की सूचना मिली। राज्य पुलिस ने सोलन जिले के धरमपुर में दिल्ली पुलिस की टीम को रोक लिया। अधिकारियों ने अंतरराज्यीय गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने ट्रांजिट रिमांड और स्थानीय पुलिस को सूचना देने के नियमों का हवाला दिया।

इसके बाद राज्य पुलिस ने दिल्ली पुलिस के वाहन शोगी और धरमपुर के पास रोके। टीम और आरोपियों को शिमला ले जाया गया। दिन भर कानूनी बहस चली। बालूगंज थाने के एसएचओ ने अदालत में निजी शिकायत भी दायर की। उन्होंने प्रक्रिया में कथित चूक का मुद्दा उठाया।

दूसरी ओर, शिमला पुलिस ने रोहड़ू के चिड़गांव थाने में दिल्ली पुलिस कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया, जिनमें अवैध जमावड़ा, घर में घुसपैठ, गलत तरीके से बंधक बनाना और अपहरण जैसे आरोप शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सादे कपड़ों में 15–20 लोग वाहनों से आए और रिसॉर्ट में ठहरे तीन लोगों को साथ ले गए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य पुलिस को पहले भरोसे में नहीं लिया गया।

शाम को जब दिल्ली पुलिस फिर से आरोपियों को लेकर निकलने लगी, तब शिमला शहर के बाहरी इलाके में बैरियर पर टीम को दोबारा रोका गया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। कई घंटे तक गतिरोध बना रहा। इस दौरान राज्य पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की।

दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस ने उनके सरकारी वाहन को जब्त करने की कोशिश की। एसीपी राहुल विक्रम ने कहा कि टीम ने जब्ती मेमो सौंपा और स्पष्ट किया कि वाहन में केस प्रॉपर्टी मौजूद है। उन्होंने कहा कि कानून के तहत वाहन जब्त नहीं किया जा सकता।

आखिरकार, देर रात तीनों आरोपियों को एसीजेएम-द्वितीय एकांश कपिल की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दिल्ली पुलिस की ट्रांजिट रिमांड याचिका पर सुनवाई की। करीब 1 बजे कोर्ट ने रिमांड मंजूर कर लिया।

रिमांड आदेश के बाद हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस के वाहनों को जाने दिया। गुरुवार सुबह करीब 5:55 बजे दिल्ली पुलिस की टीम तीनों आरोपियों के साथ शिमला से रवाना हुई।

अब दिल्ली पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों को स्थानीय मजिस्ट्रेट के सामने पेश करेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराज्यीय गिरफ्तारी प्रक्रियाओं और समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि, अदालत के आदेश के बाद फिलहाल यह टकराव समाप्त हो गया।


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