भारतीय वायु सेना ने इस महीने हुई एक और दुर्घटना के बाद तेजस लड़ाकू विमानों को अस्थायी रूप से उड़ान से रोक दिया है। हादसे के तुरंत बाद वायुसेना ने पूरे बेड़े की गहन तकनीकी जांच शुरू कर दी। अधिकारी अब हर विमान की प्रणाली की विस्तार से समीक्षा कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह घटना महीने की शुरुआत में एक अहम एयरबेस पर हुई। HAL तेजस नियमित प्रशिक्षण उड़ान पूरी कर लैंडिंग के लिए लौट रहा था। तभी विमान में तकनीकी गड़बड़ी के संकेत मिले। शुरुआती आकलन ऑनबोर्ड सिस्टम में खराबी की ओर इशारा करता है। इसके बाद विमान रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
पायलट ने स्थिति भांपते ही इजेक्शन सिस्टम सक्रिय किया। वह सुरक्षित बाहर निकल आया। मेडिकल टीम ने तुरंत उसकी जांच की। उसे गंभीर चोट नहीं लगी। हालांकि विमान के ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। अधिकारी अब इसे सेवा से बाहर करने पर विचार कर रहे हैं।
दुर्घटना के बाद वायुसेना ने करीब 30 सिंगल-सीट तेजस विमानों को ग्राउंड कर दिया। इंजीनियर अब एवियोनिक्स, फ्लाइट कंट्रोल और इंजन सिस्टम की जांच कर रहे हैं। तकनीकी टीमें डेटा रिकॉर्डर की भी पड़ताल कर रही हैं। वायुसेना स्पष्ट कारण सामने आने तक किसी जोखिम से बचना चाहती है।
यह तीसरी बार है जब तेजस विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इससे पहले मार्च 2024 में जैसलमेर के पास एक तेजस फायरपावर प्रदर्शन से लौटते समय गिरा था। उस हादसे में भी पायलट सुरक्षित बाहर निकल आया था। इसके बाद नवंबर 2025 में दुबई एयरशो के दौरान एक तेजस एरोबैटिक प्रदर्शन करते समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ। उस घटना में पायलट की जान गई। जांच एजेंसियां अभी उस मामले की समीक्षा कर रही हैं।
दरअसल तेजस कार्यक्रम भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का अहम हिस्सा है। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इस हल्के लड़ाकू विमान को विकसित किया। वायुसेना ने इसे पुराने मिग-21 विमानों की जगह शामिल किया। तेजस को बहु-भूमिका लड़ाकू विमान के रूप में तैयार किया गया।
इसी बीच तेजस Mk1A कार्यक्रम में देरी भी चिंता बढ़ा रही है। वायुसेना ने 180 Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया है। लेकिन आपूर्ति तय समय से करीब दो साल पीछे चल रही है। Mk1A संस्करण में उन्नत रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक रखरखाव सुविधाएं शामिल हैं। वायुसेना इन विमानों से अपनी लड़ाकू क्षमता मजबूत करना चाहती है।
हालिया हादसे ने कार्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव डाला है। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि बेड़े को ग्राउंड करना एहतियाती कदम है। दुनिया भर की वायुसेनाएं बड़ी दुर्घटनाओं के बाद इसी तरह व्यापक जांच करती हैं। इससे संभावित खामियों की पहचान होती है।
फिलहाल वायुसेना ने इस घटना पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। फिर भी आंतरिक स्तर पर जांच तेज है। वरिष्ठ अधिकारी नियमित समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। वायुसेना सुरक्षा और परिचालन क्षमता के बीच संतुलन बनाना चाहती है।
आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट तय करेगी कि तेजस विमान कब फिर से उड़ान भरेंगे। तब तक तकनीकी टीमें हर पहलू की जांच में जुटी रहेंगी।