कानपुर पुलिस ने गुरुवार को लैंबॉर्गिनी हादसे के मामले में शिवम मिश्रा को गिरफ्तार किया। शिवम तंबाकू उद्योगपति केके मिश्रा के बेटे हैं। इस हादसे में छह लोग घायल हुए। कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए। घटना के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई।
यह हादसा 8 फरवरी को दोपहर करीब तीन बजे हुआ। स्थान था वीआईपी रोड, ग्वालटोली इलाका। तभी एक लैंबॉर्गिनी रेवुएल्टो तेज रफ्तार में आगे बढ़ी। कार ने पैदल यात्रियों और वाहनों को टक्कर मारी। इसके बाद वह डिवाइडर पर चढ़ गई। अंत में गाड़ी रुक गई।
इसके बाद घायल ई-रिक्शा चालक मोहम्मद तौफीक ने शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पहले अज्ञात चालक के खिलाफ केस दर्ज किया। फिर जांच आगे बढ़ी। बाद में पुलिस ने एफआईआर में शिवम का नाम जोड़ा।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने शिवम को अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने कहा कि शिवम जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। उन्होंने पूछताछ से बचने की कोशिश की। इसलिए पुलिस ने गिरफ्तारी की।
इसी बीच मामले में नया मोड़ आया। एक व्यक्ति मोहन ने खुद को चालक बताया। उसने कहा कि हादसे के समय वही गाड़ी चला रहा था। उसने दावा किया कि शिवम को अचानक दौरा पड़ा।
मोहन ने बताया कि शिवम अचानक उस पर गिर पड़े। वह घबरा गया। उसने एक हाथ से गाड़ी संभालने की कोशिश की। तभी कार ने पहले एक तिपहिया को टक्कर मारी। फिर वह डिवाइडर पर चढ़ी। बाद में कार रुकी।
इसके बाद मोहन के वकील ने कोर्ट में सरेंडर अर्जी दी। मोहन ने बुधवार को आत्मसमर्पण किया। हालांकि, ग्वालटोली पुलिस ने उसे आरोपी नहीं माना। इसलिए अदालत ने उसकी अर्जी खारिज कर दी। साथ ही पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
दूसरी ओर पुलिस अपने दावे पर कायम रही। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि सबूत शिवम की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज मौजूद है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी मिले हैं। इन सभी में शिवम को ड्राइव करते दिखाया गया है।
इसके अलावा अधिकारियों ने कुछ वीडियो का हवाला दिया। इन वीडियो में लोग ड्राइवर सीट से एक व्यक्ति को बाहर निकालते दिखे। पुलिस का मानना है कि वह व्यक्ति शिवम ही था।
पुलिस ने लैंबॉर्गिनी को जब्त कर लिया है। फॉरेंसिक टीम अब तकनीकी जांच कर रही है। जांचकर्ता गाड़ी के डेटा और सिस्टम की जांच कर रहे हैं।
इस बीच बचाव पक्ष ने नई दलील दी। शिवम के वकील धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि शिकायतकर्ता केस नहीं चलाना चाहता। उन्होंने दावा किया कि आपसी समझौता हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मोहन ने इलाज का खर्च दिया।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने तौफीक को उसी दिन थाने बुलाया था। वहां लिखित समझौता हुआ। उस समय के एसएचओ संतोष कुमार गौर मौजूद थे। बाद में अधिकारियों ने उन्हें लाइन हाजिर कर दिया। वरिष्ठ अफसरों ने इस पर टिप्पणी नहीं की।
पहले शिवम के पिता ने कहा था कि गाड़ी ड्राइवर चला रहा था। बाद में उन्होंने बयान बदला। उन्होंने कहा कि जांच जरूरी है। उन्होंने तकनीकी खराबी की बात भी कही।
परिवार ने दावा किया कि शिवम को मिर्गी की बीमारी है। वह दिल्ली में इलाज कराते हैं। उन्होंने नशे और तेज रफ्तार के आरोप खारिज किए। हालांकि, पुलिस ने इन दावों को नहीं माना।
फिलहाल पुलिस गवाहों से पूछताछ कर रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। आने वाले दिनों में अदालत में अगली सुनवाई होगी। प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी।