बस्तर से अमित शाह का नक्सलियों को कड़ा संदेश, महिला कैडर से मुख्यधारा में लौटने की अपील
khabarworld 10/02/2026 0
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने मार्च 2026 तक देश से माओवाद खत्म करने का लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
शाह ने महिला नक्सली कैडर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन युवतियों का भविष्य अभी बाकी है। इसलिए उन्हें हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत में शाह ने तेलंगाना में छिपे नक्सलियों का जिक्र किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि उनका संदेश वहां तक पहुंचे। उन्होंने साफ कहा कि अब समय आ गया है कि नक्सली हथियार छोड़ दें।
शाह जगदलपुर में “बस्तर पंडुम” के समापन समारोह में बोल रहे थे। यहां भारी संख्या में लोग जुटे थे। मंच से उन्होंने सरकार की नीति स्पष्ट की।
सबसे पहले, उन्होंने कहा कि सरकार किसी से लड़ाई नहीं चाहती। उसका लक्ष्य आदिवासी गांवों की रक्षा करना है। उन्होंने आईईडी हमलों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इससे किसान और मासूम बच्चे घायल होते हैं। उन्होंने नक्सलियों से पूछा कि वे इतनी क्रूरता कहां से लाते हैं।
इसके बाद, शाह ने दोहराया कि सरकार पुनर्वास के लिए तैयार है। उन्होंने नक्सलियों से हथियार छोड़ने की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उन्हें सम्मान देगी।
फिर, उन्होंने पुनर्वास पैकेज की तारीफ की। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पैकेज युवाओं को नया जीवन देने में मदद करेगा।
उन्होंने खास तौर पर महिला कैडर का जिक्र किया। उन्होंने नक्सली नेताओं से कहा कि वे लड़कियों को वापस भेजें। उन्होंने कहा कि इन बेटियों को पढ़ने और आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।
हालांकि, शाह ने चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि जो नक्सली हथियार नहीं छोड़ेंगे, उन्हें सख्त जवाब मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा का जवाब ताकत से दिया जाएगा।
इसके साथ ही, उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की सुरक्षा की बात की। उन्होंने बताया कि 2,500 से ज्यादा पूर्व नक्सली सुरक्षित जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी पूरी रक्षा करेगी।
फिर, शाह ने नक्सलियों द्वारा किए गए नुकसान पर बात की। उन्होंने स्कूलों, अस्पतालों और मोबाइल टावरों पर हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों ने विकास को रोका।
इसके बाद, उन्होंने वैश्विक उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि माओवाद ने दुनिया में कहीं भी भलाई नहीं की। उन्होंने कोलंबिया, पेरू और कंबोडिया का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि वहां भी यह विचारधारा विफल रही।
शाह ने शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दशकों तक स्कूल बंद रहे। इससे पीढ़ियां पढ़ाई से वंचित रहीं। अब सरकार ने 40 साल बाद कई स्कूल दोबारा खोले हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर अब नई पहचान बना रहा है। शिक्षा और विकास से क्षेत्र आगे बढ़ रहा है।
आगे देखते हुए, शाह ने पांच साल की योजना बताई। उन्होंने कहा कि बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनाया जाएगा। उन्होंने अस्पताल, स्कूल और कॉलेज खोलने का वादा किया।
उन्होंने बिजली, मोबाइल नेटवर्क और सड़कों के विस्तार की बात कही। उन्होंने कहा कि 2027 तक हर गांव में बिजली पहुंचेगी। हर क्षेत्र में बैंक और पोस्ट ऑफिस खुलेंगे।
शाह ने संस्कृति संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान बंदूक नहीं, बल्कि परंपरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बस्तर की संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं।
उन्होंने किसानों के लिए समर्थन मूल्य का ऐलान किया। उन्होंने गैस सिलेंडर और नल जल योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बताई।
इसके अलावा, उन्होंने 118 एकड़ के औद्योगिक क्षेत्र की घोषणा की। इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्री, सांसद और विधायक मौजूद रहे। बस्तर पंडुम में नृत्य, संगीत, कला और पारंपरिक व्यंजन प्रस्तुत किए गए।
कुल मिलाकर, अमित शाह ने बस्तर से शांति और विकास का संदेश दिया। उन्होंने संवाद, पुनर्वास और सख्ती का संतुलन दिखाया। उन्होंने साफ कर दिया कि सरकार नक्सलवाद के खिलाफ पूरी ताकत से आगे बढ़ेगी।
