बांग्लादेश चुनाव में नया मोड़: तारीक रहमान और जमात नेताओं के बीच मुकाबला, 1700 उम्मीदवार मैदान में

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बांग्लादेश एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश करने जा रहा है। देश 12 फरवरी को आम चुनाव कराएगा। यह चुनाव अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के बाद पहला होगा। उसी आंदोलन ने लंबे समय तक सत्ता में रहीं शेख हसीना को हटाया था। इसके बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया।

सबसे पहले, चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों की सूची जारी की। करीब 1700 उम्मीदवार मैदान में हैं। 50 से ज्यादा राजनीतिक दल इसमें हिस्सा ले रहे हैं। कई निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं। कुल 300 संसदीय सीटों पर मुकाबला होगा। साथ ही, जुलाई नेशनल चार्टर पर जनमत संग्रह भी होगा। इसलिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है।

इस बार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरी है। बीएनपी ने 288 उम्मीदवार उतारे हैं। इसके बाद इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश ने 253 और जमात-ए-इस्लामी ने 224 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। जातीय पार्टी ने 192 और गोनो अधिकार परिषद ने 90 प्रत्याशी खड़े किए हैं।

बीएनपी का नेतृत्व तारीक रहमान कर रहे हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। खालिदा जिया का पिछले महीने निधन हुआ था। इसके बाद पार्टी ने नई रणनीति बनाई। दिसंबर में 17 साल बाद तारीक रहमान स्वदेश लौटे। इसके बाद उन्होंने ढाका-17 सीट से नामांकन दाखिल किया।

पहले, बीएनपी ने 2014 और 2024 के चुनावों का बहिष्कार किया था। पार्टी ने तब धांधली का आरोप लगाया था। हालांकि, 2018 में उसने चुनाव लड़ा। अब पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी है। उसका मुख्य मुकाबला जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन से है।

इसी बीच, अवामी लीग अब भी चुनाव से बाहर है। अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद सरकार ने पार्टी पर प्रतिबंध लगाया। मई 2025 में सुरक्षा कारणों से उसकी गतिविधियों पर रोक लगी। चुनाव आयोग ने उसका पंजीकरण भी रद्द कर दिया। नवंबर 2025 में ट्राइब्यूनल ने शेख हसीना को दोषी ठहराया।

हालांकि, अवामी लीग अब भी परोक्ष रूप से सक्रिय है। कई नेता निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इससे पार्टी वोटों पर असर डाल सकती है।

वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने भी वापसी की है। शेख हसीना के शासन में पार्टी पर रोक लगी थी। आंदोलन के बाद उसने संगठन मजबूत किया। पार्टी प्रमुख शफीकुर रहमान ढाका-15 से चुनाव लड़ रहे हैं। महासचिव मिया गोलाम परवर खुलना-5 से मैदान में हैं।

इसके अलावा, जातीय पार्टी भी चुनाव में उतरी है। पार्टी प्रमुख जीएम कादेर रंगपुर-3 से लड़ रहे हैं। अन्य नेता भी अलग-अलग सीटों से उम्मीदवार बने हैं।

यह चुनाव अंतरिम सरकार की निगरानी में होगा। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव का वादा किया है। उन्होंने इसे “नया बांग्लादेश” बनाने की शुरुआत बताया है।

हालांकि, हाल की हिंसा और मीडिया पर हमलों ने चिंता बढ़ाई है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।

देश में 12.7 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। करीब 500 विदेशी पर्यवेक्षक चुनाव पर नजर रखेंगे। इनमें यूरोपीय संघ और कॉमनवेल्थ के प्रतिनिधि शामिल हैं।

कुल मिलाकर, यह चुनाव बांग्लादेश के भविष्य की दिशा तय करेगा। जनता तय करेगी कि देश किस रास्ते पर आगे बढ़ेगा।


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