तेलंगाना में दलबदल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: स्पीकर को 21 दिन की अंतिम मोहलत, अवमानना की चेतावनी

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तेलंगाना की राजनीति में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा संदेश दिया है। शुक्रवार को कोर्ट ने विधानसभा स्पीकर को तीन हफ्ते का समय दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि वह इस दौरान लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लें। साथ ही, कोर्ट ने देरी पर अवमानना कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

सबसे पहले, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने मामले की सुनवाई की। दोनों जजों ने स्पीकर से जल्द निर्णय लेने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी। तब तक ठोस फैसला जरूरी होगा।

दरअसल, बीआरएस के बागी विधायकों के खिलाफ याचिकाएं लंबे समय से लंबित हैं। इनमें से दो मामलों पर अभी तक फैसला नहीं हुआ है। इससे पहले, कोर्ट ने 31 जुलाई को तीन महीने की समयसीमा तय की थी। लेकिन स्पीकर ने इस आदेश का पालन नहीं किया।

इसी कारण, बीआरएस नेताओं ने दोबारा कोर्ट का रुख किया। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने अवमानना याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर ने कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी की। उन्होंने सख्त कार्रवाई की मांग की।

इससे पहले, 16 जनवरी को कोर्ट ने स्पीकर को दो हफ्ते का समय दिया था। कोर्ट ने तीन मामलों पर निर्णय की उम्मीद जताई थी। हालांकि, इस दौरान सिर्फ एक ही मामला निपटा।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्पीकर की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि एक याचिका पर फैसला हो चुका है। उन्होंने कहा कि दो अन्य मामले अंतिम चरण में हैं। उन्होंने नगर निकाय चुनावों को देरी की वजह बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी तरफ से समय मांगा गया था।

वहीं, बीआरएस के वकीलों ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि स्पीकर को कई मौके मिले। फिर भी उन्होंने समयसीमा का पालन नहीं किया। उन्होंने देरी को जानबूझकर किया गया कदम बताया।

उन्होंने एक विधायक का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि वह विधायक बीआरएस छोड़कर कांग्रेस में गया। उसने कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा। वह हार भी गया। फिर भी वह अब तक विधायक बना हुआ है। इसलिए, अयोग्यता का मामला साफ है।

हालांकि, कोर्ट ने संतुलित रुख अपनाया। पीठ ने कहा कि विधानसभा सचिव ने पहले मार्च तक समय मांगा था। तब भी कोर्ट ने केवल दो हफ्ते दिए थे। अब एक मामला निपट चुका है। इसलिए, कोर्ट ने सीमित समय देने का फैसला किया।

साथ ही, कोर्ट ने वकीलों को चेतावनी भी दी। उसने कहा कि बहस को सोशल मीडिया कंटेंट न बनाएं। कोर्ट ने इसे “नई इंडस्ट्री” करार दिया।

इस बीच, स्पीकर ने कुछ मामलों में फैसला लिया है। उन्होंने 17 दिसंबर को पांच विधायकों पर निर्णय दिया। फिर 15 जनवरी को दो और मामलों पर आदेश जारी किया। इनमें काले यदैय्या, पोचाराम श्रीनिवास रेड्डी, तेल्लम वेंकट राव, बंडला कृष्ण मोहन रेड्डी, टी प्रकाश गौड़, गुडेम महिपाल रेड्डी और अरेकापुडी गांधी शामिल हैं।

अब एम संजय कुमार का मामला भी निपट चुका है। हालांकि, कादियम श्रीहरि और दानम नागेंद्र के केस अभी बाकी हैं।

अपने हलफनामे में स्पीकर ने आगे की तारीखें बताईं। उन्होंने कहा कि नागेंद्र के मामले में 18 फरवरी से सबूत दर्ज होंगे। वहीं, श्रीहरि का मामला 19 फरवरी को सुना जाएगा।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने अब अंतिम चेतावनी दे दी है। उसने 21 दिन की समयसीमा तय की है। अब सभी की नजर इस पर है कि स्पीकर समय पर फैसला लेते हैं या नहीं।


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