गाजियाबाद में बुधवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। तीन नाबालिग लड़कियों ने नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। मृतकों में एक 16 वर्षीय लड़की और उसकी दो सौतेली बहनें, 14 और 12 वर्ष की थीं। पुलिस ने मौत की पुष्टि की और तुरंत जांच शुरू की।
सबसे पहले, पुलिस को घटना की सूचना मिली। इसके बाद, टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने इलाके को सुरक्षित किया। फिर, वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई। मेडिकल टीम ने जांच की। बाद में, शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिले। अधिकारियों ने बताया कि तीनों लड़कियां कोरियन संस्कृति से काफी प्रभावित थीं। वे एक ऑनलाइन टास्क-आधारित गेम की आदी थीं। वे लगातार मोबाइल पर गेम खेलती रहती थीं। धीरे-धीरे, यह आदत जुनून में बदल गई।
पुलिस के अनुसार, यह लत कोविड-19 महामारी के बाद शुरू हुई। लॉकडाउन के दौरान बच्चों ने अधिक समय मोबाइल पर बिताया। इसी दौरान, गेमिंग उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गई। नतीजतन, पढ़ाई पीछे छूट गई। 16 वर्षीय लड़की अभी भी कक्षा चार में पढ़ रही थी।
इस बीच, पुलिस ने उनके कमरे से एक डायरी बरामद की। डायरी में माफी भरे नोट मिले। उसमें भावनात्मक चित्र और रोते हुए चेहरे की आकृतियां भी थीं। अधिकारियों ने इन्हें मानसिक तनाव के संकेत बताया।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि लड़कियां खुद को भारतीय नहीं मानती थीं। वे खुद को कोरियन समझने लगी थीं। वे खुद को “कोरियन प्रिंसेस” के रूप में देखती थीं। गेम ने उनकी सोच और पहचान को गहराई से प्रभावित किया।
परिवार के अनुसार, लड़कियां अपने पिता और माताओं के साथ रहती थीं। पिता पेशे से फॉरेक्स ट्रेडर थे। बड़ी लड़की पहली पत्नी से थी। जबकि बाकी दोनों दूसरी पत्नी से थीं। हालांकि, पुलिस को परिवार में किसी बड़े विवाद के संकेत नहीं मिले।
फिर भी, परिजन उनकी मोबाइल लत से परेशान थे। वे अक्सर मोबाइल छीन लेते थे। लेकिन लड़कियां किसी न किसी तरह फोन वापस ले लेती थीं। इसके बाद, वे फिर से गेम खेलने लगती थीं।
पुलिस ने उनकी दिनचर्या पर भी ध्यान दिया। तीनों बहनें हर काम साथ करती थीं। वे साथ पढ़ती थीं। साथ खाती थीं। यहां तक कि साथ बाथरूम भी जाती थीं। यह गहरा भावनात्मक जुड़ाव दिखाता है।
डायरी में उनकी रोजमर्रा की गतिविधियों का जिक्र भी मिला। उसमें गेमिंग समय, कल्पनात्मक किरदार और सपनों का विवरण था। इससे उनके वर्चुअल दुनिया में डूबने की पुष्टि होती है।
घटना की रात तीनों अपनी मां के साथ थीं। आधी रात के बाद वे पूजा कक्ष में गईं। उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद किया। फिर, उन्होंने कुर्सी की मदद से खिड़की तक पहुंच बनाई। इसके बाद, वे एक-एक कर नीचे कूद गईं।
नीचे मौजूद गार्ड और स्थानीय लोग तेज आवाज सुनकर जागे। उन्होंने तुरंत शोर मचाया। परिवार के सदस्य भी जाग गए। इसके बाद, पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। एंबुलेंस बुलाई गई। डॉक्टरों ने अस्पताल में मृत घोषित किया। इसके बाद, जांच आगे बढ़ाई गई।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने घटना को अचानक और असामान्य बताया। उसने कहा कि सब कुछ बहुत जल्दी हुआ। उसने यह भी बताया कि एक लड़की पहले कूदने वाली थी। बाकी दो उसे बचाने की कोशिश में पीछे गईं।
फिलहाल, पुलिस मोबाइल डेटा और ऐप रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साइबर विशेषज्ञ भी मदद कर रहे हैं। बाल कल्याण विभाग भी मामले पर नजर रख रहा है।
यह घटना ऑनलाइन लत के खतरे को उजागर करती है। विशेषज्ञ बच्चों पर डिजिटल नियंत्रण की सलाह देते हैं। वे माता-पिता से संवाद बढ़ाने पर जोर देते हैं।
गाजियाबाद की यह घटना समाज के लिए चेतावनी है। समय रहते बच्चों की मानसिक स्थिति समझना जरूरी है। तभी ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।