भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अटका पेंच, ट्रंप टीम पर अमेरिकी सीनेटर के आरोप

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी बीच अमेरिका से आई एक कथित लीक ऑडियो रिकॉर्डिंग ने हलचल बढ़ा दी है। इस ऑडियो में अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज़ ने व्हाइट हाउस के शीर्ष नेताओं पर सौदे में देरी का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो को जिम्मेदार ठहराया।

सबसे पहले, यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता कई महीनों से चल रही है। दोनों देशों के अधिकारी कई दौर की बातचीत कर चुके हैं। इसके बावजूद, समझौता अभी तक अंतिम रूप नहीं ले सका। हालात तब और जटिल हुए जब राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया।

इसके बाद, ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया। इस फैसले से कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। इस कदम ने द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ा दिया। साथ ही, व्यापार वार्ता पर दबाव भी बढ़ा।

इसी बीच, एक्सियोस की रिपोर्ट ने नया मोड़ दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, सीनेटर टेड क्रूज़ ने दानदाताओं से बातचीत में कहा कि वे भारत के साथ व्यापार समझौते के लिए व्हाइट हाउस से “लड़ाई” लड़ रहे हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया कि प्रशासन के भीतर ही विरोध मौजूद है। इन टिप्पणियों ने रिपब्लिकन पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को उजागर किया।

इसके अलावा, यह मामला रिपब्लिकन पार्टी में गहराते मतभेदों की ओर भी इशारा करता है। एक समय पार्टी मुक्त व्यापार की समर्थक रही है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के उभार के बाद रुख बदला। अब कई नेता संरक्षणवादी नीतियों का समर्थन करते दिखते हैं। वहीं, टेड क्रूज़ जैसे नेता इसके आर्थिक नुकसान को लेकर चिंतित हैं।

पिछले साल अप्रैल में भी मतभेद सामने आए थे। उस समय क्रूज़ और कुछ अन्य रिपब्लिकन सीनेटरों ने ट्रंप को “लिबरेशन डे” टैरिफ लागू न करने की सलाह दी थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि ऊंचे शुल्क से महंगाई बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि रिटायरमेंट सेविंग्स पर असर पड़ेगा। क्रूज़ ने आशंका जताई थी कि इससे 2026 के मध्यावधि चुनावों में पार्टी को नुकसान हो सकता है।

नतीजतन, व्यापार नीति अब राजनीतिक जोखिम से जुड़ गई है। कई वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता 2026 के चुनावों को लेकर सतर्क हैं। वे डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलने की आशंका जता रहे हैं। इसी संदर्भ में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भी आंतरिक राजनीति का हिस्सा बनता दिख रहा है।

इस बीच, टेड क्रूज़ की व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी चर्चा में हैं। राजनीतिक हलकों में उन्हें 2028 के राष्ट्रपति चुनाव का संभावित दावेदार माना जाता है। माना जाता है कि वे पार्टी में ट्रंप और वेंस के प्रभाव को चुनौती देना चाहते हैं। भारत के साथ मजबूत संबंधों की वकालत उनकी इस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

गौरतलब है कि क्रूज़ भारत-अमेरिका रिश्तों के समर्थक रहे हैं। वर्ष 2019 में भारत यात्रा के दौरान उन्होंने दोनों देशों को “स्वाभाविक सहयोगी” बताया था। उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा था। उन्होंने टेक्सास में बड़ी भारतीय-अमेरिकी आबादी का भी जिक्र किया था।

उन्होंने यह भी कहा था कि भारत और अमेरिका मानवाधिकार, मुक्त बाजार और निष्पक्ष व्यापार जैसे साझा मूल्यों में विश्वास रखते हैं। साथ ही, उन्होंने चीन को साझा चुनौती बताया था। उसी यात्रा में उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी।

अंत में, टेक्सास की घरेलू राजनीति भी इस मुद्दे से जुड़ती है। राज्य में पांच लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी रहते हैं। वे आबादी का करीब दो प्रतिशत हैं। उनकी राजनीतिक भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है।


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