नई दिल्ली – चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मिला। इससे एक दिन पहले वही प्रतिनिधिमंडल भाजपा मुख्यालय पहुंचा था। पहले ही इन बैठकों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। अब, विपक्ष ने सीधे सवाल खड़े किए हैं।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सुन हाइयान ने किया। वे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उपमंत्री हैं। उनके साथ भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने खुद आरएसएस से मुलाकात की इच्छा जताई।
आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बैठक को शिष्टाचार भेंट बताया। उन्होंने कहा कि संघ हर विचारधारा और देश के लोगों से संवाद करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल ने संगठन को समझने की इच्छा जताई। इसी क्रम में उन्होंने महासचिव दत्तात्रेय होसबाले से मुलाकात की। हालांकि, उन्होंने चर्चा के ब्योरे साझा नहीं किए।
भाजपा नेताओं ने भी बैठक को औपचारिक बताया। उन्होंने विवरण देने से इनकार किया। फिर भी, उन्होंने इसे कूटनीतिक संवाद करार दिया। पार्टी सूत्रों ने कहा कि भारत-चीन संपर्क हाल के महीनों में बढ़ा है। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ब्रिक्स शिखर बैठक को अहम माना जा रहा है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। उनके साथ विदेश मामलों के प्रमुख विजय चौथाईवाले भी रहे। बाद में, अरुण सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बैठक में आपसी संवाद और संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई।
हालांकि, कांग्रेस ने तुरंत सवाल उठाए। पार्टी ने बैठक के समय और उद्देश्य पर संदेह जताया। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि भाजपा मुख्यालय में बंद कमरे की बैठक के कुछ घंटों बाद ही चीन ने शक्सगाम घाटी पर दावा जताया। इसलिए, उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल किए।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने साफ कहा कि संवाद से उन्हें आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि समस्या भाजपा के दोहरे रवैये की है। उन्होंने भाजपा पर पाखंड और छल का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने पुराने आरोपों को याद दिलाया।
खेड़ा ने कहा कि कुछ साल पहले भाजपा ने कांग्रेस पर चीन के साथ समझौता करने को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप लगाया था। अब, वही भाजपा सत्ता में रहते हुए चीन से बातचीत कर रही है। इसलिए, कांग्रेस ने इसे विरोधाभास बताया।
खेड़ा ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों के बीच संवाद सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने माना कि भाजपा और आरएसएस विपक्ष में रहते हुए भी ऐसे संपर्क रखते रहे हैं। फिर भी, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ ऐसे मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल किया।
इसके बाद, कांग्रेस ने पारदर्शिता की मांग की। खेड़ा ने प्रधानमंत्री और भाजपा से पूछा कि इन बैठकों में क्या चर्चा हुई। उन्होंने पूछा कि क्या भारत के हित पूरी तरह सुरक्षित रहे।
खेड़ा ने गलवान घाटी संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2020 में भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद सरकार ने सख्त रुख नहीं अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने नियंत्रण रेखा पर गतिविधियां जारी रखीं। साथ ही, उन्होंने बफर जोन, नक्शों में बदलाव और निर्माण कार्यों का मुद्दा उठाया।
उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारियों के बयानों से चीन-पाकिस्तान सहयोग के संकेत मिले हैं। इसके अलावा, उन्होंने आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार चीनी सामान के बहिष्कार की बात करती है, लेकिन कंपनियों को छूट देती है।
अंत में, खेड़ा ने आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों को नीति निर्धारण में दखल नहीं देना चाहिए। इस पूरे विवाद ने भारत-चीन संबंधों पर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है।