सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: हर कुत्ते के काटने पर राज्य जिम्मेदार, फ़ीडिंग करने वाले भी होंगे जवाबदेह

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नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। शीर्ष न्यायालय ने चेतावनी दी कि हर कुत्ते के काटने, चोट या बच्चों व बुजुर्गों की मौत के मामले में राज्य को “कुछ न करने” का दंड भुगतना पड़ सकता है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि जो लोग कुत्तों को खिलाते हैं, उन्हें भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

“इसे अपने घर ले जाएँ। कुत्तों को इधर-उधर घुमने, काटने और डराने क्यों दें?” न्यायमूर्ति ने पूछा। यह टिप्पणी वकील मेनका गुरुस्वामी के “भावनात्मक मामला” कहने पर आई। कोर्ट ने कहा, “अब तक भावनाएँ केवल कुत्तों के लिए दिख रही हैं।” गुरुस्वामी ने जवाब दिया कि उनका ध्यान इंसानों पर भी है।

आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 7 नवंबर को आदेश दिया था कि कुत्तों को शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, बस अड्डे, खेल परिसर और रेलवे स्टेशनों से हटाया जाए। अदालत ने निर्देश दिए कि कुत्तों को चिन्हित शेल्टर में भेजा जाए और उन्हें वापस उसी स्थान पर न छोड़ा जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय नगरपालिकाओं को हर परिसर का नियमित निरीक्षण करने के लिए कहा ताकि कोई आवारा कुत्तों का निवास न बने। अदालत ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और खेल परिसर में कुत्तों के काटने की घटनाएँ प्रशासन की लापरवाही और “सिस्टम में विफलता” को दर्शाती हैं।

दिल्ली में जुलाई 2025 के फैसले में कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों को आवासीय क्षेत्रों से शेल्टर में स्थानांतरित किया जाए। शेल्टर में प्रशिक्षित कर्मचारी होंगे जो कुत्तों को संभालेंगे, नसबंदी और टीकाकरण करेंगे, और उन्हें बाहर नहीं छोड़ेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि कुत्तों को उठाने में बाधा डालने वाले व्यक्ति या संगठन को “कड़ी कार्रवाई” का सामना करना पड़ेगा।

दूसरी सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को वापस उसी क्षेत्र में छोड़ा जा सकता है। हालांकि, रैबीज़ से संक्रमित या संदेहित और आक्रामक कुत्तों पर यह लागू नहीं होगा।

अदालत ने नगरपालिकाओं को आवारा कुत्तों के लिए विशेष फ़ीडिंग ज़ोन बनाने का आदेश दिया। सार्वजनिक रूप से फ़ीडिंग की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि आवारा कुत्तों के कारण मानव जीवन और सुरक्षा को खतरा न पहुंचे। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि अब भावनाएँ केवल कुत्तों के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए भी मायने रखती हैं।


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