जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों को वीज़ा-फ्री ट्रांजिट दिया, भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार

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जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-फ्री एयरपोर्ट ट्रांजिट की घोषणा की है। इस फैसले से दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों का संपर्क मजबूत होगा। साथ ही यह कदम ऐसे समय आया है, जब भारत और जर्मनी रक्षा, व्यापार और तकनीक में सहयोग बढ़ा रहे हैं।

सोमवार को अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने व्यापक वार्ता की। इस दौरान दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने के कई उपायों पर सहमति बनाई। इसके बाद भारत और जर्मनी ने कुल 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों में रक्षा औद्योगिक सहयोग का रोडमैप, उच्च शिक्षा में साझेदारी और दूरसंचार क्षेत्र में सहयोग शामिल है।

इसी के साथ दोनों नेताओं ने भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की वकालत की। उनका मानना है कि यह समझौता व्यापार को विस्तार देगा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा। इसी क्रम में जर्मनी ने भारतीय नागरिकों के लिए वीज़ा-फ्री ट्रांजिट का ऐलान किया, जिससे यात्रा और संपर्क आसान होंगे।

चांसलर मर्ज एक बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत पहुंचे। यह उनका चांसलर बनने के बाद पहला एशिया दौरा रहा। इससे जर्मनी की भारत में बढ़ती रणनीतिक रुचि साफ झलकती है।

वार्ता के दौरान रक्षा सहयोग पर खास जोर रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा में बढ़ता सहयोग आपसी भरोसे और साझा दृष्टि का प्रतीक है। उन्होंने रक्षा व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए चांसलर मर्ज का आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग का रोडमैप तैयार करेंगे, जिससे सह-विकास और सह-उत्पादन के नए अवसर बनेंगे।

इसके बाद चर्चा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर आई। दोनों नेताओं ने स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएनसीएलओएस के सम्मान पर भी सहमति जताई। साथ ही एक नया द्विपक्षीय इंडो-पैसिफिक परामर्श तंत्र शुरू करने की घोषणा की। यह पहल ऐसे समय में आई है, जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं।

दोनों देशों ने इंडिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का भी समर्थन किया। नेताओं ने कहा कि यह कॉरिडोर वैश्विक व्यापार और संपर्क को नया आकार देगा। उन्होंने इसे भविष्य की आर्थिक समृद्धि के लिए अहम बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु, ऊर्जा और शहरी विकास में संयुक्त परियोजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हरित हाइड्रोजन पर नया मेगा प्रोजेक्ट भविष्य की ऊर्जा के लिए गेम चेंजर साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और जर्मनी सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाएं बना रहे हैं।

व्यापार के मोर्चे पर भी साझेदारी मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि द्विपक्षीय व्यापार अब 50 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां लंबे समय से भारत में काम कर रही हैं, जो भारत की क्षमता पर भरोसा दिखाता है।

आतंकवाद पर भी दोनों देशों ने एकजुट रुख दिखाया। नेताओं ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने इसके खिलाफ मिलकर पूरी दृढ़ता से लड़ने का संकल्प लिया। दोनों नेताओं ने भारत में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की और आतंकियों व उनके नेटवर्क पर कार्रवाई का समर्थन किया।

चांसलर मर्ज ने लोगों से लोगों के संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जर्मनी को भारत से कुशल कामगारों की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। नई स्किल पार्टनरशिप से भारतीय स्वास्थ्य पेशेवरों को जर्मनी जाने में मदद मिलेगी। जर्मनी में पहले से करीब तीन लाख भारतीय और 60 हजार छात्र रहते हैं।

अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा और वैश्विक सुधारों की बात की। उन्होंने जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी है और भारत-जर्मनी जी4 समूह के जरिए इस दिशा में साथ काम कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, वीज़ा-फ्री ट्रांजिट का फैसला भारत-जर्मनी रिश्तों को नई ऊंचाई देता है और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है।


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