ईरान इस समय दशकों के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। देशभर में जारी प्रदर्शन हिंसक हो चुके हैं। अब तक कम से कम 646 लोगों की जान जा चुकी है। इसी बीच तेहरान ने कड़ा संदेश दिया है। ईरानी सरकार ने कहा है कि वह बातचीत और युद्ध, दोनों के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
सबसे पहले पृष्ठभूमि समझते हैं। ईरान में प्रदर्शन दो हफ्ते से ज्यादा समय पहले शुरू हुए। शुरुआत महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ हुई। धीरे-धीरे गुस्सा बढ़ा। फिर यह आंदोलन राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ खुली चुनौती में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले धार्मिक शासन को निशाने पर लिया। विश्लेषक इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे गंभीर संकट मान रहे हैं।
सोमवार को तेहरान ने दोहरा रुख दिखाया। एक तरफ ईरान ने वॉशिंगटन से संपर्क बनाए रखा। दूसरी तरफ उसने सख्त चेतावनी भी दी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान युद्ध के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि बातचीत का रास्ता भी खुला है। उन्होंने यह बयान ट्रंप की बार-बार मिलिट्री हस्तक्षेप की धमकियों के बाद दिया।
इसी बीच ट्रंप ने दबाव और बढ़ाया। सोमवार देर रात उन्होंने बड़ा ऐलान किया। ट्रंप ने कहा कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उस पर अमेरिका 25 फीसदी टैरिफ लगाएगा। उन्होंने इसे अंतिम फैसला बताया। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि टैरिफ किस कानूनी आधार पर लगेगा। व्हाइट हाउस ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।
अब मौत और गिरफ्तारी के आंकड़ों पर नजर डालते हैं। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA के मुताबिक, सोमवार देर तक 646 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। मरने वालों में 505 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। इसके अलावा 113 सुरक्षाकर्मी और सात आम नागरिक भी मारे गए। संगठन ने 579 अन्य मौतों की भी जांच शुरू की है। वहीं, 28 दिसंबर से अब तक 10,721 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
इसके साथ ही सरकार ने सूचना पर शिकंजा कस दिया है। अधिकारियों ने इंटरनेट ब्लैकआउट लागू किया। यह बंदी साढ़े तीन दिन से ज्यादा समय से जारी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार दमन की असली तस्वीर छिपाना चाहती है। इंटरनेट बंद होने से प्रदर्शनकारियों का संपर्क भी टूटा है।
हालांकि तनाव के बावजूद बैकचैनल बातचीत चलती रही। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि अमेरिका से संपर्क का चैनल खुला है। उन्होंने कहा कि अराघची और ट्रंप के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ जरूरत पड़ने पर संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं। अमेरिका के ईरान में राजनयिक संबंध नहीं हैं। स्विट्जरलैंड दूतावास उसके हितों का प्रतिनिधित्व करता है।
अब आर्थिक पहलू पर आते हैं। ईरान ओपेक का सदस्य और बड़ा तेल उत्पादक है। विश्व बैंक के अनुसार, ईरान ने 2022 में 147 देशों के साथ व्यापार किया। चीन उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। उसी साल ईरान ने चीन को 22 अरब डॉलर का निर्यात किया। इसमें आधे से ज्यादा हिस्सा ईंधन का रहा। 2025 में चीन ने ईरान के 80 फीसदी से ज्यादा निर्यातित तेल को खरीदा।
भारत भी ईरान के साथ व्यापार करता है। 2025 के पहले दस महीनों में द्विपक्षीय व्यापार 1.34 अरब डॉलर रहा। भारत ईरान को चावल, फल, सब्जियां और दवाएं भेजता है। तुर्की, जर्मनी, दक्षिण कोरिया और जापान भी सीमित स्तर पर व्यापार करते हैं।
अंत में असर की बात करें। बाजार इस संकट पर नजर रखे हुए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान की अस्थिरता से तेल कीमतें बढ़ सकती हैं। बार्कलेज के मुताबिक, ईरान में अशांति से तेल में 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल का भू-राजनीतिक जोखिम जुड़ चुका है। हालात और बिगड़े तो वैश्विक बाजारों पर दबाव और बढ़ेगा।