ISRO ने जासूसी सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ लॉन्च किया, निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को मिला बड़ा बढ़ावा

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श्रीहरिकोटा — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मंगलवार को भरोसेमंद पीएसएलवी रॉकेट से सफल उड़ान भरी। इस लॉन्च ने पिछले साल की नाकामी के बाद मजबूत वापसी दर्ज की। मिशन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और निजी अंतरिक्ष उद्योग, दोनों को नई गति दी।

सबसे पहले, पीएसएलवी-C62 ने सुबह 10:18 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। यह पीएसएलवी का 64वां मिशन रहा। इस उड़ान को ISRO ने PSLV-C62/EOS-N1 नाम दिया। वैज्ञानिकों ने रॉकेट की स्थिर और सटीक उड़ान पर नजर रखी।

इसके बाद, रॉकेट ने कुल 15 उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जाने की जिम्मेदारी निभाई। इनमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित जासूसी सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ भी शामिल रहा। यह उपग्रह रणनीतिक उद्देश्यों के लिए अहम भूमिका निभाएगा।

महत्वपूर्ण रूप से, अन्वेषा अत्याधुनिक इमेजिंग क्षमता से लैस है। यह सैटेलाइट दुश्मन ठिकानों की बेहद सटीक मैपिंग कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की निगरानी क्षमता में बड़ा इजाफा मानते हैं।

इस बीच, मिशन ने अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट EOS-N1 को भी कक्षा में स्थापित किया। ISRO ने EOS-N1 और 14 सह-यात्री उपग्रहों को सन सिंक्रोनस ऑर्बिट में भेजने की योजना बनाई। लॉन्च के करीब 17 मिनट बाद उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण हुआ।

इसके अलावा, मिशन में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी दिखी। थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम द्वारा निर्मित उपग्रह इस उड़ान का हिस्सा बने। इससे वैश्विक लॉन्च सेवा प्रदाता के रूप में ISRO की साख और मजबूत हुई।

इसके बाद, मिशन का एक और अहम चरण सामने आया। स्पेन के एक स्टार्टअप द्वारा विकसित 25 किलोग्राम वजनी केस्टरेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर यानी KID कैप्सूल का प्रदर्शन शामिल रहा।

फिर, वैज्ञानिकों ने रॉकेट के चौथे चरण PS4 को दोबारा चालू किया। उन्होंने इस चरण का इस्तेमाल डी-बूस्ट प्रक्रिया के लिए किया। इसके चलते KID कैप्सूल को री-एंट्री ट्रैजेक्टरी पर डाला गया। अलग होने के बाद PS4 और KID कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश कर गए। दोनों का साउथ पैसिफिक महासागर में सुरक्षित स्प्लैशडाउन हुआ।

रणनीतिक सफलता के साथ-साथ यह मिशन निजी क्षेत्र के लिए भी ऐतिहासिक साबित हुआ। पहली बार किसी एक भारतीय निजी कंपनी ने एक ही पीएसएलवी मिशन में सात उपग्रह भेजे। हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस ने ये उपग्रह तैयार किए।

इसके चलते, भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग चर्चा में आ गया। ध्रुवा स्पेस ने सैटेलाइट डिजाइन से लेकर मिशन सपोर्ट तक अपनी क्षमता दिखाई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत के स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम की परिपक्वता का संकेत है।

पृष्ठभूमि की बात करें तो मई 2025 में पीएसएलवी मिशन तीसरे चरण में आई गड़बड़ी के कारण असफल रहा था। उस घटना के बाद यह लॉन्च भरोसा बहाल करने के लिहाज से बेहद अहम रहा।

अंत में, PSLV-C62 मिशन ने कई लक्ष्य पूरे किए। इसने सुरक्षा, तकनीक और निजी भागीदारी को एक साथ आगे बढ़ाया। अन्वेषा के साथ ISRO ने नई उड़ान भरी और भारत के अंतरिक्ष भविष्य को और मजबूत आधार दिया।


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