ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की जल्दबाज़ी उजागर, संवैधानिक बदलावों पर CDS अनिल चौहान का बड़ा बयान

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नई दिल्ली – भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को पाकिस्तान पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई विफलताओं ने पाकिस्तान को जल्दबाज़ी में संवैधानिक बदलाव करने पर मजबूर किया। उन्होंने यह बात पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल में संबोधन के दौरान कही।

सबसे पहले, जनरल चौहान ने साफ शब्दों में पाकिस्तान की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की रणनीति कमजोर साबित हुई। इसलिए, इस्लामाबाद ने आनन-फानन में रक्षा ढांचे में बदलाव किए। उनके मुताबिक, ये बदलाव इस बात की स्वीकारोक्ति हैं कि ऑपरेशन के दौरान सब कुछ योजना के अनुसार नहीं चला।

इसके बाद, उन्होंने पाकिस्तान के संविधान में हुए अहम संशोधन की ओर ध्यान दिलाया। पाकिस्तान ने संविधान के अनुच्छेद 243 में बदलाव किया। इस बदलाव के तहत, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन का पद खत्म कर दिया गया। यह पद तीनों सेनाओं के बीच तालमेल के लिए बनाया गया था।

हालांकि, पाकिस्तान ने इसके बदले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज यानी CDF का पद बनाया। लेकिन जनरल चौहान ने इसकी बड़ी कमी गिनाई। उन्होंने कहा कि इस पद का गठन केवल सेना प्रमुख कर सकता है। इसलिए, यह व्यवस्था संयुक्त सैन्य कमान की मूल भावना के खिलाफ जाती है।

इसके अलावा, पाकिस्तान ने नेशनल स्ट्रैटेजी कमांड और आर्मी रॉकेट फोर्सेज कमांड भी बनाए। जनरल चौहान ने कहा कि ये कदम पारंपरिक और रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत कर सकते हैं। लेकिन साथ ही, इससे शक्ति का केंद्रीकरण भी बढ़ता है। उनके अनुसार, यह पूरी व्यवस्था एक ज़मीन-केंद्रित सोच को दर्शाती है।

उन्होंने आगे कहा कि अब पाकिस्तान का सेना प्रमुख ज़मीनी अभियानों के साथ-साथ नौसेना और वायुसेना के साथ संयुक्त अभियानों का भी जिम्मा संभालेगा। साथ ही, रणनीतिक और परमाणु मामलों पर भी उसी का नियंत्रण होगा। रॉकेट फोर्सेज कमांड का गठन इस केंद्रीकरण को और गहरा करता है।

इसके बाद, जनरल चौहान ने भारत के लिए मिलने वाले सबक पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर से कई अहम सीख ली हैं। इसके अलावा, उरी सर्जिकल स्ट्राइक, डोकलाम और गलवान गतिरोध, और बालाकोट एयर स्ट्राइक से भी महत्वपूर्ण अनुभव मिले हैं।

उन्होंने कहा कि इन सभी घटनाओं ने उच्च रक्षा संगठन में सुधार की जरूरत को उजागर किया। इसलिए, भारत सभी परिस्थितियों के लिए कमांड ढांचे को मानकीकृत करने पर काम कर रहा है।

संयुक्त थिएटर कमांड पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने इसकी समयसीमा 30 मई 2026 तक बढ़ाई है। हालांकि, सशस्त्र बल तय समय से पहले इस ढांचे को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।

अंत में, जनरल चौहान ने रणनीतिक बलों की भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि रणनीतिक बल मुख्य रूप से परमाणु क्षमताओं से जुड़े होते हैं। भारत का फोकस एक लचीली लेकिन स्पष्ट कमांड प्रणाली बनाने पर है, जो पारंपरिक और परमाणु दोनों खतरों से निपट सके।

उन्होंने दो टूक कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। वह केवल विराम पर है।” उनके अनुसार, हालिया अभियानों से मिली सीख भारत की रक्षा नीति और उच्च कमान की संरचना को लगातार दिशा दे रही है।


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