ईरान में बगावत तेज, मौतों की संख्या बढ़ी; इंटरनेट बंद, खामेनेई ने ट्रंप पर खून के आरोप लगाए

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ईरान शुक्रवार को गहरे राजनीतिक संकट से जूझता दिखा। देशभर में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हुए। प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं सीमित रखीं। सड़कों पर भारी सुरक्षा तैनाती नजर आई। इसी बीच, मौतों की संख्या लगातार बढ़ती गई।

ये विरोध प्रदर्शन पिछले महीने शुरू हुए थे। हालांकि, गुरुवार को हालात और बिगड़ गए। निर्वासित युवराज रजा पहलवी के आह्वान के बाद लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने सीधे धार्मिक शासन को निशाने पर लिया। उन्होंने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए।

एसोसिएटेड प्रेस ने कार्यकर्ताओं के हवाले से बड़ी जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है। ईरानी सरकारी मीडिया लंबे समय तक चुप रहा। लेकिन शुक्रवार को उसने “हताहतों” की बात मानी। हालांकि, उसने कोई संख्या नहीं बताई।

इसी दौरान, अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने अलग आंकड़े पेश किए। एजेंसी के अनुसार, अब तक 65 से अधिक लोगों की जान गई। साथ ही, सुरक्षा बलों ने कम से कम 2,311 लोगों को हिरासत में लिया। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रदर्शन 31 प्रांतों के 180 शहरों तक फैल चुके हैं। कुल 512 स्थानों पर विरोध दर्ज हुआ।

इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को हुई थी। तब तेहरान की दो बड़ी बाजारों से आवाज उठी। लोग महंगाई और रियाल की गिरती कीमत से नाराज थे। बाद में आर्थिक गुस्सा राजनीतिक असंतोष में बदल गया। नतीजतन, आंदोलन पूरे देश में फैल गया।

इस बीच, सरकार ने सख्ती बढ़ाई। शुक्रवार को भी इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं। संचार मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने यह फैसला मौजूदा हालात को देखते हुए लिया। इससे देश के बाहर सूचना पहुंचना मुश्किल हो गया।

असर विमान सेवाओं पर भी पड़ा। दुबई और ईरान के बीच कम से कम 17 उड़ानें रद्द हुईं। दुबई एयरपोर्ट की वेबसाइट ने इसकी पुष्टि की। साथ ही, टर्किश एयरलाइंस ने भी ईरान के ऊपर से कई उड़ानें रद्द कर दीं।

उधर, ईरानी नेतृत्व ने तीखा रुख अपनाया। शुक्रवार को खामेनेई ने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को “अहंकारी” कहा। साथ ही, दावा किया कि ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने हैं।

खामेनेई ने चेतावनी भी दी। उन्होंने साफ संकेत दिए कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। उन्होंने ट्रंप के समर्थन बयान को खारिज किया। खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शनकारी अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

ईरानी टीवी पर उनके भाषण के दौरान “डेथ टू अमेरिका” के नारे भी गूंजे। खामेनेई ने ट्रंप से अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी कई पोस्ट किए। इन पोस्ट में उन्होंने वेनेजुएला को लेकर ट्रंप की नीतियों पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका तेल के लिए कदम उठाता है।

इसके अलावा, खामेनेई ने जून में हुई 12 दिन की जंग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान हजार से ज्यादा ईरानी मारे गए। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने खुद इन हमलों का आदेश देने की बात मानी थी।

ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गोलामहुसैन मोहसनी-एजेई ने भी सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को अधिकतम सजा मिलेगी। उन्होंने किसी भी कानूनी नरमी से इनकार किया।

इस बीच, रजा पहलवी ने अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग तेज की। उन्होंने ट्रंप से तत्काल कार्रवाई की अपील की। सोशल मीडिया पर उन्होंने ईरानियों से सड़कों पर उतरने का आह्वान जारी रखा। गुरुवार और शुक्रवार को कई जगहों पर लोग उनके समर्थन में नारे लगाते दिखे।

रजा पहलवी के पिता ईरान के आखिरी शाह थे। वे 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले देश छोड़ गए थे। अब, दशकों बाद, ईरान एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा नजर आता है।


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