“जीभ काट दूँगा” बयान पर बवाल: रेवंत रेड्डी की चेतावनी से विपक्ष भड़का

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तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में नई बहस छेड़ दी। उन्होंने विपक्ष की आलोचनाओं पर सीधा जवाब दिया। उन्होंने आक्रामक भाषा अपनाई। फिर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को खुली चुनौती दी। इसी दौरान माहौल गरमा गया।

रेवंत रेड्डी ने कहा कि सरकार किसानों के साथ खड़ी रहती है। फिर उन्होंने स्वर और ऊँचा किया। उन्होंने कहा कि कोई सरकार की निष्ठा पर सवाल न उठाए। वह बोले, आलोचना करो। सवाल पूछो। बहस करो। लेकिन राज्यभक्ति पर चोट मत करो। फिर उन्होंने दोहराया कि वह “जीभ काट देंगे”। उन्होंने कहा कि लोग इस चेतावनी को याद रखें।

इसी बीच उन्होंने पूर्व BRS सरकार के कामकाज पर हमला किया। उन्होंने कहा कि दस वर्षों में पिछली सरकार ने कुछ नहीं किया। फिर उन्होंने दावा किया कि नई सरकार लगातार अनुमति लाती है। वह कहते रहे कि सरकार पानी लाने की कोशिश करती है। इसलिए, वह विपक्ष पर अपमान की राजनीति का आरोप लगाते रहे।

इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ा। कई विधायक नाराज़ हुए। कुछ नेता चिल्लाए। कुछ सदस्य वेल तक पहुँचे। हालाँकि, स्पीकर ने शांति की अपील की। फिर भी तनाव बना रहा।

अब राजनीति बाहर तक फैल गई। BJP ने कड़ा रुख लिया। पार्टी ने X पर पोस्ट डाली। उसने कहा कि मुख्यमंत्री मर्यादा तोड़ते हैं। वह लोकतांत्रिक मर्यादा की सीमा लांघते हैं। पार्टी ने कांग्रेस पर भी वार किया। उसने कहा कि कांग्रेस अहंकार दिखाती है। इसलिए, वह लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान नहीं करती।

फिर, तेलंगाना BJP अध्यक्ष रामचंदर राव बोले। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की भाषा दूसरों को उकसाती है। उन्होंने कहा कि CPI नेता भी अब ऐसी भाषा अपनाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि विधानसभा गलत उदाहरण बनाती है। इसलिए, उन्होंने सभी दलों से संयम की अपील की।

इसके बाद BRS नेता दासोजू श्रीवन कुमार सामने आए। उन्होंने रेवंत रेड्डी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने राहुल गांधी से हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस ने तेलंगाना को कैसा मुख्यमंत्री दिया। उन्होंने कहा कि सदन अब मज़ाक बन रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को अहंकारी कहा। फिर उन्होंने दावा किया कि भाषा लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ जाती है।

लेकिन दृश्य यहाँ नहीं रुका। कांग्रेस ने भी अपना पक्ष रखा। प्रवक्ता सामा राम मोहन रेड्डी बोले। उन्होंने कहा कि आलोचक पहले खुद को देखें। उन्होंने कहा कि विपक्ष बाहर अपमानजनक शब्द बोलता है। इसलिए, वह नैतिकता का पाठ न पढ़ाए। साथ ही उन्होंने कहा कि BRS ने राज्य के साथ विश्वास तोड़ा। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने सदन में तथ्य रखे।

अंततः बहस और तेज हो गई। विधानसभा में शब्दों का टकराव चलता रहा। लेकिन बड़ा सवाल अभी खड़ा है। क्या राजनीति भाषा को और नीचे खींचेगी? या नेता आचरण की नई रेखा तय करेंगे? फिलहाल, जवाब मुल्तवी रहता है। पर, विवाद ज़रूर बढ़ता जाता है।


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