मध्य प्रदेश HIV-थैलेसीमिया कांड: जांच में अब तक क्या सामने आया

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मध्य प्रदेश – मध्य प्रदेश सरकार की जांच ने एक गंभीर स्वास्थ्य लापरवाही उजागर की है। जांच इस सवाल पर केंद्रित है कि सतना में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को रक्त चढ़ाने के दौरान HIV कैसे हुआ। शुरुआती रिपोर्ट ने सिस्टम की कई कमजोरियों की ओर इशारा किया है।

सबसे पहले, जांच टीम ने ब्लड सेंटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अधिकारियों ने रक्तदाताओं के रिकॉर्ड सही तरीके से नहीं रखे। स्टाफ ने टेस्टिंग किट की कंपनी और बैच नंबर दर्ज नहीं किए। इसके अलावा, कर्मियों ने HIV समेत जरूरी जांच समय पर नहीं की। इन कमियों ने बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाला।

इसके बाद, रिपोर्ट ने वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका तय की। जांच में डॉ. मनोज शुक्ला का नाम सामने आया। वे उस समय सतना जिला अस्पताल में सिविल सर्जन और मुख्य अधीक्षक थे। सरकार ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। संतोषजनक जवाब न देने पर उन पर सेवा नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

जांच टीम के अनुसार, डॉ. शुक्ला ने ब्लड सेंटर का नियमित निरीक्षण नहीं किया। जबकि यह उनकी जिम्मेदारी थी। उन्होंने रक्त की सही जांच और अनिवार्य रिकॉर्ड के रखरखाव पर भी ध्यान नहीं दिया। रिपोर्ट ने इन चूकों को गंभीर कर्तव्य उल्लंघन बताया। हालांकि, डॉ. शुक्ला ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय एड्स नियंत्रण समिति के नोडल अधिकारियों ने उनके कार्यालय को HIV संक्रमण की जानकारी नहीं दी।

इसके बाद जांच का फोकस ब्लड बैंक प्रभारी पर गया। पैथोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र पटेल उस समय ब्लड बैंक के प्रभारी थे। राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। साथ ही, सरकार ने उनका तबादला जबलपुर संभाग के क्षेत्रीय स्वास्थ्य निदेशक कार्यालय में कर दिया।

जांच टीम के अनुसार, डॉ. पटेल पर ब्लड बैंक के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी थी। लेकिन उन्होंने इस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया। रिपोर्ट ने इसे भी कर्तव्य का गंभीर उल्लंघन बताया। वहीं, डॉ. पटेल ने दावा किया कि ब्लड बैंक ने आधुनिक CLIA मशीन से सभी नमूनों की जांच की थी। उनके अनुसार, दान के समय सभी सैंपल HIV नेगेटिव आए थे। जांच एजेंसियां अब इन दावों की पड़ताल कर रही हैं।

इसके अलावा, जांच ने लैब तकनीशियनों की भूमिका भी तय की। तकनीशियन रामभाई त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लगे। उनकी जिम्मेदारी रक्त की जांच और रिकॉर्ड संभालने की थी। जांच में सामने आया कि बिना पूरी जांच के बच्चों को रक्त चढ़ाया गया।

इसी तरह, तकनीशियन नंदलाल पांडेय पर भी लापरवाही के आरोप लगे। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने नियमों के अनुसार रक्त की जांच नहीं की। उन्होंने जरूरी रिकॉर्ड भी नहीं रखे। इसके बावजूद रक्त का उपयोग किया गया। जांच समिति ने इसे सीधी प्रशासनिक चूक माना।

इस बीच, सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाया। राज्य और केंद्र के स्वास्थ्य विभागों की कई टीमें मामले की जांच कर रही हैं। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की एक टीम सतना पहुंचने वाली है। यह टीम तकनीकी और प्रक्रियात्मक पहलुओं की समीक्षा करेगी।

साथ ही, जांचकर्ता लगभग 200 रक्तदाताओं का डेटा खंगाल रहे हैं। वे रक्त संग्रह से लेकर ट्रांसफ्यूजन तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रहे हैं। इसके अलावा, निजी नर्सिंग होम्स की सूची भी तैयार की जा रही है, जहां रक्त चढ़ाया जाता है।

कुल मिलाकर, जांच अब सिस्टम की हर परत तक पहुंच रही है। सरकार जिम्मेदारी तय करने के संकेत दे चुकी है। आने वाले दिनों में रिपोर्ट और सख्त कदमों की दिशा तय कर सकती है।


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