चाय पर संवाद: संसद सत्र के अंत में पीएम मोदी और प्रियंका गांधी की सौहार्दपूर्ण बातचीत

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संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को सौहार्द के साथ खत्म हुआ। हफ्तों तक सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक चली। इसके बावजूद आखिरी दिन माहौल बदला। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने परंपरागत चाय बैठक की मेज़बानी की। सभी दलों के सांसद इसमें शामिल हुए। बातचीत ने टकराव की जगह ले ली।

इसी बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की सहज बातचीत दिखी। बैठक के दृश्य सामने आए। प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री के सामने बैठीं। उनके पास रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बैठे थे। दोनों नेताओं की बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में ध्यान खींचा।

सबसे पहले चर्चा भाषा और क्षेत्र से जुड़ी। प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री को बताया कि वह मलयालम सीख रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे वायनाड के लोगों से संवाद आसान होता है। प्रियंका गांधी केरल के वायनाड से लोकसभा सांसद हैं। स्थानीय भाषा सीखने की उनकी कोशिश ने बातचीत को निजी रंग दिया।

इसके बाद चर्चा विदेश नीति की ओर बढ़ी। प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री से हालिया विदेश यात्रा के बारे में पूछा। पीएम मोदी हाल ही में अफ्रीका और मध्य पूर्व के दौरे पर गए थे। उन्होंने इथियोपिया का जिक्र किया। मोदी ने कहा कि इथियोपिया भारत में बनी आम धारणा से काफी अलग है। उन्होंने देश को सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ता बताया। इस टिप्पणी ने बातचीत को हल्का और सूचनात्मक बनाए रखा।

फिर माहौल और हल्का हुआ। प्रधानमंत्री ने शीतकालीन सत्र की अवधि पर चुटकी ली। इस सत्र में सिर्फ 15 बैठकें हुईं। समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव ने सत्र को छोटा बताया। इस पर मोदी ने मजाकिया अंदाज़ में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कम बैठकें उनके गले के लिए अच्छी रहीं। उन्होंने जोड़ा कि उन्हें ज्यादा दिन चिल्लाना नहीं पड़ा। इस टिप्पणी पर सदन में हंसी गूंज उठी।

बैठक में कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। एनसीपी की सुप्रिया सुले ने हिस्सा लिया। डीएमके के ए राजा भी पहुंचे। केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू और राजीव रंजन सिंह बैठक में दिखे। चिराग पासवान भी शामिल हुए। अलग-अलग दलों की मौजूदगी ने बैठक को व्यापक बनाया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बैठक के बाद प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा किया। उन्होंने कहा कि 18वीं लोकसभा के छठे सत्र के बाद सभी दलों के नेताओं के साथ सुखद संवाद हुआ। उनके शब्दों ने बैठक की भावना को दर्शाया।

यह चाय बैठक हर सत्र के अंत में होती है। इसका उद्देश्य अनौपचारिक संवाद बढ़ाना रहता है। हालांकि, इस साल बजट सत्र के बाद विपक्ष ने इस बैठक का बहिष्कार किया था। उस समय राजनीतिक तनाव चरम पर था। ऐसे में शीतकालीन सत्र की बैठक खास मानी गई।

शीतकालीन सत्र 19 दिनों तक चला। कुल बैठकों का समय 92 घंटे 25 मिनट रहा। संसद की उत्पादकता 111 प्रतिशत दर्ज हुई। आंकड़े सक्रिय बहस की तस्वीर दिखाते हैं। वहीं, अंतिम दिन की बैठक ने राजनीति का दूसरा पहलू दिखाया।

कुल मिलाकर, सत्र का अंत सकारात्मक संकेत के साथ हुआ। तीखी बहसों के बाद संवाद की जगह बनी। चाय की मेज़ पर नेता खुले मन से मिले। हंसी और बातचीत ने माहौल बदला। संसद ने दिखाया कि मतभेदों के बावजूद संवाद संभव है।


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