नई सूची के अनुसार, 19 देशों के नागरिकों के अमेरिका आने पर पूरी तरह रोक लगेगी। इनमें सीरिया, अफगानिस्तान, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान, यमन, इरिट्रिया, हैती, म्यांमार, चाड, रिपब्लिक ऑफ कांगो, इक्वेटोरियल गिनी, बुर्किना फासो, माली, नाइजर, साउथ सूडान, सिएरा लियोन और लाओस शामिल हैं।
व्हाइट हाउस ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस संबंध में एक आधिकारिक घोषणा पर हस्ताक्षर किए। प्रशासन का कहना है कि इन देशों में यात्रियों की जांच, सत्यापन और सूचना साझा करने की व्यवस्था कमजोर है। इसी वजह से अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा के खतरे दिखते हैं।
इसलिए प्रशासन ने प्रवेश नियमों को और मजबूत करने का फैसला किया। व्हाइट हाउस ने साफ किया कि नए प्रतिबंध 1 जनवरी से लागू होंगे। तब तक संबंधित एजेंसियां नियमों को लागू करने की तैयारी करेंगी।
इस बीच, अमेरिका ने कुछ देशों पर आंशिक यात्रा प्रतिबंध भी लगाए हैं। इनमें अफ्रीका का सबसे अधिक आबादी वाला देश नाइजीरिया शामिल है। इसके अलावा आइवरी कोस्ट और सेनेगल पर भी सीमित पाबंदियां लगाई गई हैं। खास बात यह है कि ये दोनों देश अगले साल होने वाले फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं, जिसकी मेजबानी अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको करेंगे।
इसके अलावा, अफ्रीका और कैरेबियन क्षेत्र के कई अन्य देशों को भी आंशिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। इनमें अंगोला, एंटीगुआ और बारबुडा, बेनिन, डोमिनिका, गैबॉन, गाम्बिया, मलावी, मॉरिटानिया, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे शामिल हैं। इनके साथ ही पॉलिनेशियाई देश टोंगा का नाम भी सूची में है।
अब सवाल उठता है कि प्रशासन ने यह कदम क्यों उठाया। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से अमेरिका में प्रवेश नियमों को सख्त करने पर जोर देता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कमजोर दस्तावेजी प्रक्रिया और सीमित डेटा साझा करना अमेरिका के लिए जोखिम पैदा करता है।
हाल ही में एक घटना ने इस सोच को और मजबूत किया। थैंक्सगिविंग वीकेंड पर दो नेशनल गार्ड सैनिकों पर गोलीबारी के मामले में एक अफगान नागरिक की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद प्रशासन ने संकेत दिया कि वह यात्रा प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा सकता है।
इससे पहले जून में ट्रंप ने 12 देशों के नागरिकों पर पूरी तरह बैन लगाया था। वहीं, सात अन्य देशों के लोगों पर आंशिक रोक लगाई थी। अब नई घोषणा ने इस नीति को और विस्तार दे दिया है।
ट्रंप की घोषणा में एक और बात सामने आई। राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका ऐसे विदेशियों को रोकना चाहता है जो उसकी संस्कृति, सरकार, संस्थानों या मूल सिद्धांतों को कमजोर करना चाहते हैं। प्रशासन ने इसे राष्ट्रीय हित से जुड़ा कदम बताया।
हालांकि, इस फैसले पर विवाद भी शुरू हो गया है। आलोचकों का कहना है कि यह नीति कई देशों के आम नागरिकों को बेवजह प्रभावित करती है। उनके अनुसार, यह कदम भेदभावपूर्ण है और वैध यात्रियों के लिए मुश्किलें बढ़ाता है।
इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन अपने फैसले पर अडिग दिखता है। संकेत साफ हैं कि आने वाले समय में अमेरिका की यात्रा और आव्रजन नीति और सख्त हो सकती है।