MGNREGA को बदलने वाले बिल पर कांग्रेस का तीखा हमला, गांधी का नाम हटाने पर थरूर की आपत्ति
कांग्रेस ने सोमवार को सरकार पर सीधा हमला बोला। मुद्दा बना MGNREGA को बदलने वाला नया बिल। पार्टी ने कहा कि सरकार महात्मा गांधी का नाम हटाकर उनकी विरासत पर चोट कर रही है। साथ ही, कांग्रेस ने इसे गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया।
सबसे पहले, कांग्रेस ने Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) यानी VB-G RAM G Bill, 2025 पर आपत्ति जताई। पार्टी ने कहा कि यह बिल अधिकार आधारित रोजगार गारंटी की आत्मा को कमजोर करता है। कांग्रेस के अनुसार, नया ढांचा राज्यों और मजदूरों के खिलाफ जाता है।
इसी क्रम में, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और RSS MGNREGA को खत्म करने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि RSS की शताब्दी के वर्ष में गांधी का नाम हटाना, प्रधानमंत्री के श्रद्धांजलि वाले दावों की सच्चाई दिखाता है।
खरगे ने आगे कहा कि जो सरकार गरीबों के अधिकारों से चिढ़ती है, वही MGNREGA पर हमला करती है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस संसद में और सड़कों पर इसका विरोध करेगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी मजदूरों और गरीबों के अधिकार छिनने नहीं देगी।
इसके बाद, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वैचारिक सवाल उठाया। उन्होंने योजना का नाम बदलने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज और राम राज्य कभी विरोधी विचार नहीं रहे। उन्होंने इन्हें गांधी की सोच के दो स्तंभ बताया। थरूर ने कहा कि ग्रामीण गरीबों की योजना से गांधी का नाम हटाना इस गहरे संबंध की अनदेखी है।
थरूर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि गांधी की अंतिम सांस भी ‘राम’ का स्मरण थी। उन्होंने चेतावनी दी कि जहां विभाजन नहीं है, वहां कृत्रिम टकराव न खड़ा किया जाए। बाद में, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति सीधे गांधी का नाम हटाने पर है।
इसी बीच, प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि योजना का नाम बदलने की जरूरत क्या है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से फाइलें, स्टेशनरी और दफ्तरों में बदलाव होता है। इस पर सरकारी पैसा खर्च होता है। उन्होंने पूछा कि इसका लाभ क्या है।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि महात्मा गांधी केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े नेता हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि उनका नाम हटाने के पीछे मंशा क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में असली मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
संसद के भीतर, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रणनीतिक मांग रखी। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष तीन अहम बिलों को स्थायी समितियों को भेजना चाहता है। इनमें उच्च शिक्षा आयोग बिल, परमाणु ऊर्जा बिल और G-RAM-G बिल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन बिलों पर गहन अध्ययन और व्यापक चर्चा जरूरी है।
सरकार इस बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी में है। बिल के मसौदे के अनुसार, यह हर ग्रामीण परिवार को 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी देगा। इसके लिए वयस्क सदस्यों को अकुशल श्रम के लिए स्वेच्छा से काम करना होगा।
हालांकि, वित्तीय ढांचे में बड़ा बदलाव दिखता है। केंद्र और राज्य खर्च साझा करेंगे। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए अनुपात 90:10 रहेगा। अन्य राज्यों के लिए 60:40 का फार्मूला लागू होगा। जिन केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा नहीं है, वहां पूरा खर्च केंद्र उठाएगा। पहले MGNREGA पूरी तरह केंद्रीय योजना थी।
कांग्रेस ने अंत में चेतावनी दी। पार्टी ने कहा कि मांग आधारित योजना की जगह केंद्र नियंत्रित मॉडल लाया जा रहा है। कांग्रेस के अनुसार, यह बदलाव काम के अधिकार को ही कमजोर करता है। पार्टी ने कहा कि यह कदम गांधी के आदर्शों के खिलाफ जाता है।
