तीसरे दिन भी ‘गंभीर’ रही दिल्ली की हवा, जहरीले स्मॉग से घुटन बढ़ी, उड़ानों पर असर
नई दिल्ली – दिल्ली ने सोमवार को एक और खतरनाक सर्द सुबह देखी। घना स्मॉग पूरे शहर पर छा गया। नतीजतन, वायु गुणवत्ता लगातार तीसरे दिन ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रही। लोग घरों से निकले, लेकिन हवा ने सांस लेना मुश्किल कर दिया।
सुबह 6 बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 457 दर्ज हुआ। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के आंकड़ों ने साफ संकेत दिए। कई इलाकों में दृश्यता तेजी से गिरी। इसलिए सड़कों पर चलना और दूर तक देखना कठिन हो गया।
इसी बीच, स्मॉग ने शहर के हर हिस्से को ढक लिया। मुख्य सड़कों से लेकर रिहायशी इलाकों तक धुंध छाई रही। परिणामस्वरूप, स्वास्थ्य जोखिम बढ़े। बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई।
वहीं, हवाई यातायात पर भी असर दिखा। खराब दृश्यता के कारण उड़ानों में देरी की आशंका बढ़ी। दिल्ली एयरपोर्ट और एयरलाइंस ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की। यात्रियों से समय से पहले पहुंचने की अपील की गई।
इससे पहले, सप्ताहांत में हालात और बिगड़े। सोमवार सुबह प्रदूषण ने नई ऊंचाई छू ली। अशोक विहार, जहांगीरपुरी, रोहिणी और वजीरपुर में AQI 500 तक पहुंच गया। यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अधिकतम दर्ज सीमा है। चूंकि AQI स्केल 500 से आगे नहीं जाता, इसलिए वास्तविक प्रदूषण इससे भी ज्यादा रहा।
आंकड़ों ने संकट की गंभीरता और बढ़ा दी। रविवार को दिल्ली के 39 में से 38 मॉनिटरिंग स्टेशन ‘गंभीर’ या ‘गंभीर-प्लस’ श्रेणी में रहे। इसके अलावा, 13 स्टेशनों पर AQI कई घंटों तक 490 से ऊपर बना रहा।
प्रदूषण बोर्ड AQI 101 से 200 को ‘मध्यम’ मानता है। 201 से 300 ‘खराब’ कहलाता है। 301 से 400 ‘बहुत खराब’ होता है। 400 से ऊपर पहुंचते ही स्थिति ‘गंभीर’ बन जाती है। 450 से अधिक स्तर पर एजेंसियां ‘गंभीर-प्लस’ अलर्ट मानती हैं। 500 का स्तर बेहद खतरनाक माना जाता है।
उधर, दृश्यता ने भी चिंता बढ़ाई। सुबह करीब 7 बजे IGI एयरपोर्ट पर दृश्यता घटकर 50 मीटर रह गई। मौसम विभाग ने पहले ही घने कोहरे की चेतावनी जारी की थी। इसके बाद एयरपोर्ट प्रशासन ने संभावित देरी और व्यवधान की जानकारी दी। इस बीच, अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
शहर के अन्य हिस्सों में भी हालात समान रहे। वीडियो फुटेज में बाराखंबा रोड, अक्षरधाम और बवाना स्मॉग की मोटी परत में डूबे दिखे। इससे साफ हुआ कि प्रदूषण किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रहा।
डेटा ने हॉटस्पॉट भी गिनाए। 38 स्टेशनों में से 24 ने ‘गंभीर-प्लस’ स्तर पार किया। पांच स्टेशन सीधे 500 पर पहुंचे। आनंद विहार में AQI 493 रहा। डीटीयू, पंजाबी बाग, ओखला फेज-2, पटपड़गंज और डीयू नॉर्थ कैंपस भी गंभीर सूची में शामिल रहे।
अब सवाल उठता है कि हालात इतने खराब क्यों हुए। विशेषज्ञ मौसम को मुख्य कारण मानते हैं। शुक्रवार से हवा की रफ्तार बेहद कम रही। इसलिए प्रदूषक हवा में ही फंसे रहे। साथ ही, दिल्ली की कटोरे जैसी भौगोलिक संरचना समस्या बढ़ाती है। सर्दियों में ठंडी हवा नीचे फंस जाती है और प्रदूषण जमीन के पास टिक जाता है।
इसके अलावा, बारिश की कमी ने हालात और बिगाड़े। वाहन उत्सर्जन और निर्माण धूल लगातार योगदान दे रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञ एक राहत भी गिनाते हैं। पराली जलाने की घटनाएं अब प्रमुख कारण नहीं रहीं। पंजाब और हरियाणा में फसल जलाने के मामलों में इस साल साफ गिरावट दिखी।
फिलहाल, मौसम से राहत की उम्मीद कम है। इसलिए दिल्ली के लोग एक और दिन जहरीली हवा, कम दृश्यता और बढ़ती चिंताओं के साथ बिताने को मजबूर हैं।
