केरल के मुनंबम वार्ड में NDA की बड़ी जीत, वक्फ भूमि विवाद ने बदली सियासी तस्वीर

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केरल – केरल के मुनंबम वार्ड में एनडीए ने स्थानीय निकाय चुनाव में जोरदार जीत दर्ज की। यह नतीजा साधारण नहीं रहा। मुनंबम लंबे समय से वक्फ भूमि विवाद का केंद्र बना हुआ है। इसलिए यह फैसला राज्य की राजनीति में खास मायने रखता है।

मुनंबम एर्नाकुलम जिले में स्थित है। वर्ष 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने यहां 404 एकड़ से अधिक जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित किया। इसके बाद विवाद शुरू हुआ। इस जमीन पर करीब 500 परिवार रहते हैं। इनमें से अधिकांश ईसाई समुदाय से हैं। परिवारों ने बेदखली की आशंका जताई। तभी से विरोध तेज होता चला गया।

पिछले एक साल से अधिक समय से लोग लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने मुनंबम लैंड प्रोटेक्शन काउंसिल के बैनर तले प्रदर्शन किए। उन्होंने सड़क पर उतरकर आवाज उठाई। साथ ही, उन्होंने अदालत का भी दरवाजा खटखटाया। उनकी मुख्य मांग रही कि उनके भूमि राजस्व अधिकार बहाल किए जाएं।

इस बीच, सरकार ने विवादित जमीन पर रहने वाले परिवारों से भूमि कर लेना बंद कर दिया। इस फैसले ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी। उन्हें लगा कि इससे उनकी कानूनी स्थिति और कमजोर हो जाएगी। नतीजतन, गुस्सा सड़कों पर साफ दिखने लगा।

इसी पृष्ठभूमि में चुनाव आए। शुरुआत में परिवारों ने मतदान के बहिष्कार का फैसला किया। वे विरोध दर्ज कराने के लिए वोट न डालने पर विचार कर रहे थे। लेकिन बाद में रणनीति बदली। समुदाय के नेताओं ने मतदान को हथियार बनाने की अपील की। आखिरकार, बड़ी संख्या में लोग वोट डालने पहुंचे।

एनडीए ने चुनाव में विवाद को प्रमुख मुद्दा बनाया। उसके नेताओं ने खुलकर वक्फ दावे का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वे मुनंबम के लोगों के साथ खड़े हैं। उन्होंने जमीन के अधिकार और सुरक्षा का भरोसा दिलाया। यह संदेश सीधे मतदाताओं तक पहुंचा।

नतीजतन, एनडीए को स्पष्ट बढ़त मिली। कांग्रेस, जिसने पिछला चुनाव जीता था, इस बार पीछे रह गई। परिणाम आते ही भाजपा नेताओं ने इसे ऐतिहासिक करार दिया। केरल भाजपा के महासचिव अनूप एंटनी जोसेफ ने कहा कि मोदी सरकार और भाजपा ने मुनंबम के लोगों का साथ दिया। उन्होंने कहा कि जनता ने उसी समर्थन को अपना जनादेश बनाया।

यह जीत भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है। केरल में पार्टी अब तक सीमित प्रभाव ही बना पाई है। ऐसे में मुनंबम की सफलता 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मनोबल बढ़ाने वाली है। पार्टी को उम्मीद है कि यह जीत नए राजनीतिक अवसर खोलेगी।

साथ ही, तिरुवनंतपुरम निगम में भी भाजपा की बढ़त ने चर्चा तेज कर दी है। यह वही क्षेत्र है, जहां से कांग्रेस सांसद शशि थरूर लोकसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन संकेतों से राज्य की सियासी जमीन में हलचल साफ दिखती है।

वहीं, मुनंबम के लोगों ने नतीजों के बाद सतर्क प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब उनकी मांगों पर ठोस कदम उठेंगे। उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ चुनावी जीत नहीं है। यह उनके भविष्य से जुड़ा सवाल है।

अब दबाव एनडीए पर है। लोगों की नजरें अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जमीन के अधिकार और कर से जुड़े मुद्दों पर जल्द समाधान नहीं आया, तो असंतोष फिर उभर सकता है।

कुल मिलाकर, मुनंबम का नतीजा एक वार्ड तक सीमित नहीं रहा। इसने दिखा दिया कि स्थानीय मुद्दे केरल की राजनीति की दिशा बदल सकते हैं। साथ ही, यह भी साफ हुआ कि जमीन से जुड़े सवाल मतदाताओं के फैसले में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।


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