“समाजवादी से मजवाड़ी”: भाजपा ने उड़ान खर्च पर सिद्धारमैया पर साधा निशाना
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के हवाई यात्रा खर्च को लेकर भाजपा नेता सी.टी. रवि ने शुक्रवार को तीखा हमला बोला। नए जारी सरकारी रिकॉर्ड से पता चला कि मई 2023 से नवंबर 2025 के बीच राज्य ने उनके हेलीकॉप्टर और चार्टर्ड विमान यात्रा पर 47 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। रवि ने सिद्धारमैया की ‘समाजवादी’ छवि पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब वह ‘मजवाड़ी’ बन गए हैं, जो विलासिता और व्यक्तिगत आराम को प्राथमिकता देते हैं।
रवि ने कहा, “समाजवादी से सिद्धारमैया अब मजवाड़ी बन गए हैं। सड़कें खराब होने की वजह से वे सड़क मार्ग से यात्रा नहीं करते। राज्य के लोग उनके हवाई यात्रा खर्च का भुगतान कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि यह खर्च जनता की जेब पर भारी पड़ रहा है।
सिद्धारमैया के आर्थिक सलाहकार और कांग्रेस विधायक बसवराज राय रेड्डी ने इस आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री केवल आधिकारिक दौरों के लिए हवाई यात्रा का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे 79 वर्ष के हैं और केवल आधिकारिक दौरे के लिए यात्रा कर रहे हैं। इसमें क्या गलत है? यह राशि प्रधानमंत्री द्वारा किए गए हजारों करोड़ रुपये के खर्च की तुलना में बड़ी नहीं है।”
सिद्धारमैया के हवाई यात्रा खर्च का विवरण भाजपा एमएलसी एन. रवि कुमार द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सामने आया। 2023-24 वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री और उनके दल के लिए चार्टर्ड फ्लाइट्स पर राज्य सरकार ने 12.23 करोड़ रुपये खर्च किए। रिकॉर्ड में बेंगलुरु के एचएएल एयरपोर्ट से मैसुरु, हब्बल्ली, बेलगावी और कालाबुरगी जैसे जिलों के लिए कई यात्रा विवरण शामिल हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में चार्टर्ड विमान का खर्च बढ़कर 21.11 करोड़ रुपये हो गया। रिकॉर्ड के अनुसार, शुरुआती 2024 में कई बहु-क्षेत्रीय दौरे आयोजित किए गए, जिनमें उड़ुपी, चित्रदुर्ग, हावेरी, बीदर और कालाबुरगी के लिए हेलीकॉप्टर यात्रा शामिल थी। इसके अलावा, चेन्नई, हैदराबाद और अन्य महानगरीय स्थलों के लिए फिक्स्ड-विंग विमान का उपयोग भी किया गया।
अक्टूबर 2025 से नवंबर 2025 तक अलग अनुबंध सूची में चार्टर्ड सेवाओं पर 14.03 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च का विवरण है। इसमें कई प्रविष्टियां “सीएम और अन्य एयरक्राफ्ट सेक्टर” के रूप में अंकित हैं।
भाजपा नेता इस खर्च को सिद्धारमैया की जनता-हितैषी छवि के विपरीत बता रहे हैं और इसे विलासिता का उदाहरण मानते हैं। वहीं कांग्रेस नेता कहते हैं कि ये सभी यात्रा केवल प्रशासनिक और विकास कार्यों के लिए हैं। उनका तर्क है कि कर्नाटक जैसे बड़े और विविध राज्य में शासन के लिए जिले और महानगरों के बीच व्यापक यात्रा आवश्यक है।
सिद्धारमैया के हवाई यात्रा खर्च ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। भाजपा इसे विलासिता और अनुचित खर्च के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे शासन आवश्यकताओं का हिस्सा मानती है। आगामी हफ्तों में यह मुद्दा मीडिया और विधानसभा में दोनों जगह जोर पकड़ सकता है।
