इंडिगो संकट गहराया: डीजीसीए ने चार निरीक्षकों को हटाया, उड़ान व्यवस्था पर बड़ी कार्रवाई

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देश के विमानन क्षेत्र में शुक्रवार को बड़ा मोड़ आया। डीजीसीए ने इंडिगो के लिए उड़ान संचालन की निगरानी करने वाले चार निरीक्षकों को हटाया। यह फैसला उस समय आया जब इंडिगो लगातार बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द कर रहा था और हजारों यात्री देशभर के हवाई अड्डों पर फंसे हुए थे।

सबसे पहले संकट की पृष्ठभूमि देखें। नवंबर में लागू हुए एफडीटीएल (Flight Duty Time Limitations) के दूसरे चरण ने नई शर्तें तय कीं। इंडिगो इन नियमों के अनुसार अपनी क्रू रोस्टरिंग को समय पर नहीं बदल सका। इसके बाद उड़ानें देरी से चलने लगीं। फिर अचानक देशभर में रद्दीकरण बढ़ गया। शुक्रवार को स्थिति सबसे खराब रही, जब एक दिन में 1,600 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं।

इस बीच सरकार ने तेजी से कदम उठाए। उसने एयरलाइन को समय पर रिफंड जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही उसने अन्य एयरलाइनों को टिकट कीमतें नियंत्रित रखने को कहा ताकि यात्री और परेशानी में न पड़ें।

इसके बाद डीजीसीए ने स्थिति को और नज़दीक से देखने का फैसला किया। गुरुवार को एजेंसी के अधिकारी सीधे इंडिगो मुख्यालय पहुंचे और संचालन की निगरानी शुरू की। उसी दिन दिल्ली और बेंगलुरु में 200 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं।

डीजीसीए ने निरीक्षकों को हटाते हुए कहा कि वे इंडिगो की सुरक्षा जांच, पायलट प्रशिक्षण और संचालन अनुपालन पर नजर रखते थे। एजेंसी ने माना कि लगातार बिगड़ती उड़ान व्यवस्था के बीच मजबूत निगरानी की कमी दिखी, इसलिए उसने यह कार्रवाई की। यह कदम उस समय आया जब इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स आज नियामक के सामने पेश होने वाले हैं।

इसके बाद सरकार ने और एक बड़ा आदेश जारी किया। उसने इंडिगो को अपनी दैनिक उड़ान क्षमता में 10% कटौती करने को कहा ताकि शेड्यूल स्थिर हो सके और यात्रियों को राहत मिल सके। इंडिगो ने कहा कि वह अब लगभग 1,950 उड़ानें चलाएगा, जिनमें लगभग 3 लाख यात्री यात्रा करेंगे। आमतौर पर एयरलाइन अपनी सर्दियों की समयसारिणी में करीब 2,300 उड़ानें संचालित करती है।

2 दिसंबर से देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर लगभग 5,000 उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। इससे यात्रियों को लंबी कतारों, देरी और अनिश्चित यात्रा योजनाओं का सामना करना पड़ा।

अब सरकार भी कई सवाल उठा रही है। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने संसद में बताया कि इंडिगो ने संकट से सिर्फ एक दिन पहले हुई बैठक में कोई चेतावनी नहीं दी। उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने किसी भी संभावित समस्या का संकेत नहीं दिया।

पूरे घटनाक्रम ने इंडिगो के संचालन मॉडल, क्रू प्रबंधन और नियामक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डीजीसीए के कदम से अब एयरलाइन पर दबाव बढ़ गया है कि वह अपनी व्यवस्था सुधार करे।

यात्रियों की उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उड़ानें स्थिर होंगी, टिकट कीमतें सामान्य होंगी और एयरलाइन फिर से भरोसा कायम करेगी। देश के सबसे बड़े घरेलू कैरियर के लिए यह समय भारी परीक्षा का है।


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