मैक्सिको ने इस हफ्ते अपने व्यापार नियमों में बड़ा बदलाव किया। उसने भारत समेत कई एशियाई देशों से आने वाले आयात पर भारी शुल्क लगा दिया। वह लंबे समय से मुक्त व्यापार को बढ़ावा देता था, लेकिन अब उसने करवट बदल ली और संरक्षणवाद की राह पकड़ ली।
सदन में यह बदलाव आसानी से पास हुआ। ऊपरी सदन ने 1,400 से ज्यादा उत्पादों पर नए शुल्क को मंजूरी दी। कुछ मदों पर शुल्क 50% तक पहुंचेगा, जबकि ज्यादातर पर 35% दर लागू होगी। ये दरें अगले साल से लागू होंगी और 2026 तक बढ़ेंगी। इस लिस्ट में चीन, भारत, कोरिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया शामिल हैं। ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, मेटल और फुटवियर जैसे सेक्टर सीधे प्रभावित होंगे।
भारत को क्यों फर्क पड़ेगा
भारत ने लैटिन अमेरिका में अपना निर्यात बढ़ाने की रणनीति बनाई थी। विशेषकर टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग सामान के लिए मैक्सिको उसके लिए महत्वपूर्ण गेटवे बना था। कई भारतीय कंपनियां मैक्सिको के रास्ते उत्तर अमेरिका में पहुंच बनाती थीं। लेकिन अब यह रास्ता कठिन हो गया है। स्थानीय उद्योगों ने भी चेतावनी दी कि एशिया से आने वाला सामान महंगा होगा और लागत बढ़ेगी।
भारत के लिए बड़े असर
यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए तीन चुनौतियाँ खड़ी करता है—
– प्रतिस्पर्धा घटेगी।
– कंपनियों को सप्लाई चेन फिर से सोचनी पड़ेगी।
– मैक्सिको के रास्ते अमेरिका तक सामान भेजना महंगा होगा।
भारत सरकार ने अब तक इस पर कोई बयान नहीं दिया है।
अमेरिका की छाया भी दिखी
कई विश्लेषक मानते हैं कि मैक्सिको ने यह फैसला अमेरिकी दबाव में लिया। अगले साल USMCA का रिव्यू होने वाला है। इसलिए मैक्सिको ने चीन पर सख्त रुख दिखाकर वॉशिंगटन को संकेत दिया है कि वह अमेरिकी लाइन अपनाने को तैयार है। हालांकि राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने संबंधों से इनकार किया, लेकिन नए शुल्क अमेरिकी पैटर्न से काफी मेल खाते हैं।
पहले प्रस्ताव में शुल्क और भी ज्यादा थे, लेकिन सांसदों ने दो-तिहाई उत्पादों पर बोझ कम कर दिया। फिर भी सरकार का अनुमान है कि उसे अगले साल करीब 52 अरब पेसो यानी 19,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी। यह पैसा वह वित्तीय घाटा कम करने में लगाएगी।
मैक्सिको में मिली-जुली प्रतिक्रिया
विपक्षी सांसद मारियो वाज़क्वेज़ ने कहा कि यह कदम कुछ उद्योगों को राहत देगा, लेकिन आम उपभोक्ता पर इसका बोझ बढ़ेगा। वहीं सत्ता पक्ष के मोरेना सांसदों ने दलील दी कि यह फैसला मैक्सिको के उद्योगों को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूती देगा और नौकरियां बचाएगा।
स्थानीय ऑटो सेक्टर इस फैसले से खुश है। उनका कहना है कि चीन तेज़ी से मैक्सिको के बाजार में बढ़ रहा है और घरेलू उद्योग को खतरा पैदा कर रहा है। अब आयातित चीनी कारों पर 50% शुल्क लगेगा, जिससे उन्हें रोकना आसान होगा।
आगे क्या?
नई नीति मैक्सिको की अर्थव्यवस्था मंत्रालय को यह अधिकार देती है कि वह बिना किसी रोक के गैर-FTA देशों पर शुल्क बदल सके। इससे भारतीय निर्यातकों को आगे भी अनिश्चितता झेलनी पड़ सकती है।
कुल मिलाकर, यह फैसला दिखाता है कि उत्तर अमेरिका अब खुली अर्थव्यवस्था से दूर जा रहा है और संरक्षणवाद तेज़ी से बढ़ रहा है।