लोकसभा में शाह बनाम राहुल टकराव पर सियासी तूफ़ान, दोनों पक्षों ने तेज़ किया हमला
लोकसभा ने बुधवार को एक तेज़ और टकराव भरा दिन देखा। सुबह सत्र शुरू होते ही माहौल गर्म हो गया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और गृह मंत्री अमित शाह आमने-सामने आ गए। दोनों ने चुनावी सुधारों पर अपनी-अपनी लाइन खींच दी। इसके बाद बहस दिशा बदलती गई और सदन में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज़ हुआ।
अमित शाह ने शुरुआत में ही साफ कर दिया कि वह विशेष मतदाता सूची संशोधन को ज़रूरी मानते हैं। वह कहते हैं कि undocumented घुसपैठियों को हटाने का यही तरीका है। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने उन पर सीधा हमला बोल दिया। उन्होंने शाह को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही अपनी ‘vote theft’ लाइन पर खुली बहस की चुनौती दे दी। इस चुनौती ने माहौल और गरम कर दिया।
इसके बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई सामने आए। उन्होंने कहा कि शाह ने विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय “लिखी हुई स्क्रिप्ट” पढ़ी। गोगोई ने याद दिलाया कि कांग्रेस कई बार चुनाव आयोग के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुकी है, कई शिकायतें दे चुकी है। फिर उन्होंने पूछा कि अगर शाह को मतदाता सूची “दूषित” लग रही थी, तो क्या उन्हें यह सूची लोकसभा चुनाव के समय दिखी ही नहीं।
फिर सु्प्रिया श्रीनेट ने हमला तेज़ किया। उन्होंने कहा कि शाह ने अपने भाषण में “व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी” के पन्ने पढ़े। उन्होंने पूछा कि बिहार में SIR प्रक्रिया होने के बाद कितने घुसपैठिए पकड़े गए। उन्होंने दावा किया कि UPA के दौरान दस साल में 88,000 घुसपैठियों को बाहर किया गया, जबकि NDA सरकार 11 साल में केवल 2,400 लोगों को ही बाहर कर सकी। प्रियंका गांधी ने भी इस बहस में कहा कि “निर्दोष व्यक्ति इतनी लंबी सफाई नहीं देता।”
इसके बाद सदन का माहौल बदल गया। शाह का भाषण जारी था, तभी विपक्ष एकसाथ वॉकआउट कर गया। यह कदम NDA के सांसदों को नागवार लगा। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि यह “शर्मनाक” है कि राहुल गांधी सवाल पूछकर बाहर चले गए जबकि शाह उनके हर सवाल का जवाब दे रहे थे। सूर्या ने SIR पर विपक्ष के “ड्रामा” की आलोचना की और कहा कि विपक्ष लगातार झूठ फैलाता रहा है।
उधर, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शाह की तारीफ की और कहा कि उन्होंने विपक्ष के “प्रोपेगेंडा” को ध्वस्त कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शाह के भाषण को “उत्कृष्ट” कहा और दावा किया कि शाह ने तथ्यों के साथ लोकतंत्र की ताकत रखी है और विपक्ष के “झूठ” को उजागर किया है।
अंत में, पीयूष गोयल ने भी SIR पर सरकार की लाइन दोहराई। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को “साफ और पारदर्शी” बनाने का यही रास्ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष घुसपैठिए वोटों पर राजनीति करता है, इसलिए बहस से भाग खड़ा हुआ।
इस तरह संसद का पूरा दिन शाह बनाम राहुल की बहस में उलझा रहा। दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक संदेश जनता तक पहुँचाते रहे और सियासी तापमान लगातार बढ़ता गया।
