भारत ने इस हफ्ते तकनीक की दुनिया में बड़ा मोड़ देखा। मंगलवार को दुनिया के सबसे बड़े टेक नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले और भारत में एआई और सेमीकंडक्टर निवेश का विशाल ब्लूप्रिंट सामने रखा। ये मुलाकातें उस समय हुईं जब डोनाल्ड ट्रंप लगातार अमेरिकी कंपनियों को देश से बाहर निवेश रोकने का निर्देश दे रहे थे। लेकिन इसके बावजूद सिलिकॉन वैली ने भारत की ओर रुख किया और ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट लाइन को साफ तौर पर नज़रअंदाज़ किया।
सबसे पहले माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला आए। उन्होंने चार वर्षों में 17.5 बिलियन डॉलर निवेश का वादा किया। उन्होंने कहा कि यह निवेश भारत की एआई-प्रथम अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगा। यह प्रतिबद्धता माइक्रोसॉफ्ट के जनवरी 2025 में किए गए 3 बिलियन डॉलर निवेश से भी आगे जाती है। कंपनी हैदराबाद में बड़ी ऑफिस स्पेस भी ले चुकी है और 2030 तक 2 करोड़ भारतीयों को एआई कौशल देने का लक्ष्य रखती है।
इसके बाद अमेज़न ने कदम बढ़ाया। कंपनी ने 2030 तक 35 बिलियन डॉलर लगाने की घोषणा की। इस निवेश का बड़ा हिस्सा एआई क्षमता बढ़ाने में जाएगा। अब अमेज़न इस दशक के अंत तक भारत में कुल 75 बिलियन डॉलर लगाने की तैयारी कर चुका है। गूगल भी पीछे नहीं रहा और उसने विज़ाग में 15 बिलियन डॉलर का डेटा सेंटर क्लस्टर बनाने की योजना पेश की।
इसी बीच चिप सेक्टर में भी बड़ी हलचल दिखी। इंटेल के सीईओ लिप-бу तान ने मोदी से मुलाकात की और भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को पूरा समर्थन देने की बात कही। सरकार पहले ही चिप निर्माण के लिए 76,000 करोड़ रुपये रख चुकी है। मुलाकात से कुछ घंटे पहले इंटेल ने टाटा समूह के साथ एक समझौता किया था। अब कंपनी गुजरात और असम में बन रही टाटा की फैब इकाइयों में अपने उत्पाद बनवाने की तैयारी करती दिख रही है।
इसके बाद कॉग्निज़ेंट के सीईओ रवि कुमार एस मिले। उन्होंने चेन्नई और पुणे में संचालन विस्तार, एआई अपनाने में तेजी और डिजिटल इंजीनियरिंग में नई नौकरियों पर ध्यान केंद्रित किया।
इन बैठकों ने साफ कर दिया कि भारत एआई और इनोवेशन का नया वैश्विक हब बन रहा है। और यह सिर्फ शुरुआत है। ओपनएआई ने हाल ही में दिल्ली में अपना पहला भारतीय कार्यालय खोला। मेटा बेंगलुरु में नया ऑफिस शुरू कर रहा है। गूगल ने अपना विशाल “अनंता” कैम्पस खोला। एप्पल ने भी 1.5 बिलियन डॉलर निवेश की घोषणा की है, जबकि लैम रिसर्च और कोहेसिटी ने 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा की योजनाएँ बताई हैं।
2025 भारत के लिए एआई उछाल का साल बन गया है। एआई मिशन शुरू होने के बाद देश में डेटा सेंटर और चिप इकाइयों में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में 74 एआई स्टार्टअप ने 1.16 बिलियन डॉलर जुटाए। यह वैश्विक स्तर पर कम लग सकता है, लेकिन भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह बड़ा संकेत है।
ट्रंप ने इस दौरान सिलिकॉन वैली पर “ग्लोबलिस्ट मानसिकता” का आरोप लगाया और कहा कि अमेरिकी कंपनियों को देश में रहकर एआई दौड़ जीतनी चाहिए। लेकिन अमेरिकी टेक दिग्गज उनकी इस अपील को नज़रअंदाज़ करते दिखे।
भारत को आकर्षित करने वाली असली वजहें और भी गहरी हैं—800 मिलियन इंटरनेट यूज़र्स, विशाल स्मार्टफोन बाज़ार, तेज़ी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और एआई कौशल से लैस विशाल युवा कार्यबल।
एआई को बड़े पैमाने पर विविध डेटा चाहिए। और भारत जैसा विविध, डिजिटल और विस्तारशील बाज़ार किसी और देश में नहीं मिलता। इसलिए बिग टेक अब भारत को सिर्फ बाज़ार नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकी शक्ति के रूप में देख रहा है।