इंडिगो संकट ने राम मोहन नायडू को राष्ट्रीय फ़ोकस में लाया, युवा मंत्री सबसे बड़ी परीक्षा का सामना कर रहे हैं

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इंडिगो संकट ने देश की विमानन व्यवस्था हिला दी। बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द हुईं और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। ऐसे माहौल में नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू खुद मोर्चे पर उतरे। वह कहते रहे कि यह जिम्मेदारी आसान नहीं होगी, लेकिन वह हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। अब वह अपने राजनीतिक करियर की सबसे कठिन परीक्षा दे रहे हैं।

पिछले सप्ताह से मंत्रालय लगातार दबाव में है। नायडू ने तुरंत इंडिगो के शीर्ष प्रबंधन से बैठकें शुरू कीं। मंगलवार को उन्होंने दिल्ली में इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स से मुलाकात की और स्थिरीकरण उपायों की जानकारी ली। उन्होंने एयरलाइन को स्थिति सुधारने के लिए समयबद्ध योजना लागू करने के निर्देश दिए।

नायडू की राजनीतिक यात्रा भी उतनी ही दिलचस्प है। उन्होंने 2012 में अपने पिता के. येर्रन नायडू की मौत के बाद राजनीति में कदम रखा। दो साल बाद उन्होंने 27 वर्ष की उम्र में श्रीकाकुलम लोकसभा सीट जीत ली। तब से वह हर चुनाव में जीतते रहे। वह टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के बेहद करीबी माने जाते हैं। पार्टी के भीतर उन्हें दिल्ली में “सीएम की आँख और कान” कहा जाता है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि उनकी राजनीतिक समझ, शांत स्वभाव और विश्लेषण क्षमता उन्हें खास बनाती है।

उन्होंने अपने पिता की जनसेवा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। वह युवाओं को राजनीति में लाने की बात करते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने “पॉलिटिक्स फ़ॉर इम्पैक्ट” नाम का इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया, जिससे युवाओं को शासन प्रणाली को समझने का मौका मिलता है।

इसके अलावा नायडू ने कई राजनीतिक संकटों में अहम भूमिका निभाई। जब सितंबर 2023 में चंद्रबाबू नायडू को स्किल डेवलपमेंट मामले में गिरफ्तार किया गया, तो उन्होंने दिल्ली में समर्थन जुटाने में बड़ी भूमिका निभाई। पार्टी के नेताओं के मुताबिक वह हर राजनीतिक गलियारे में सक्रिय रहे और टीडीपी के पक्ष में माहौल बनाने में सफल रहे।

केंद्रीय मंत्री के रूप में नायडू ने अहम घटनाओं को भी संभाला। अहमदाबाद में एयर इंडिया दुर्घटना के बाद उन्होंने जांच रिपोर्ट का दृढ़ता से समर्थन किया, जबकि विदेशी मीडिया ने उस पर सवाल उठाने की कोशिश की। संसद में भी वह सक्रिय रहे। 2021 में उन्होंने पितृत्व अवकाश लेकर लैंगिक अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी। वह मासिक धर्म स्वास्थ्य, सेक्स शिक्षा और जीएसटी-मुक्त सेनेटरी पैड के लिए खुलकर आवाज उठाते रहे।

इसी सप्ताह, जब वाईएसआरसीपी नेताओं ने उनसे इस्तीफ़े की मांग शुरू की, तब उन्होंने राज्यसभा में इंडिगो संकट पर विस्तृत बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि उड़ानों में अव्यवस्था इंडिगो के “क्रू रोस्टरिंग और आंतरिक योजना” की गड़बड़ियों से पैदा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि किसी नियामक बदलाव ने संकट नहीं पैदा किया।

महिला अधिकारों पर उनके मजबूत रुख ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दी। हैदराबाद की दिशा बलात्कार चर्चा में “नो मींस नो” पर उनका भाषण सुर्खियों में आया। सोनिया गांधी ने भी उनकी स्पष्ट बातों की तारीफ़ की।

आज इंडिगो संकट के बीच पूरा देश उन पर नज़र रखे हुए है। वह तेज फैसले ले रहे हैं, सीधे संवाद कर रहे हैं और हर मोर्चे पर नेतृत्व दिखा रहे हैं—ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने वादा किया था।


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