इंडिगो संकट, ‘वंदे मातरम्’ बहस और 10 घंटे का SIR मुकाबला आज संसद में
नई दिल्ली – संसद आज तेज़ और तना हुआ दिन देखेगी। सुबह से ही इंडिगो संकट, वंदे मातरम् पर बहस और 10 घंटे लंबी SIR चर्चा राष्ट्रीय राजनीति को दिशा देंगे। हर मुद्दा सीधे टकराव की ओर बढ़ेगा और दोनों सदन एक विषय से दूसरे विषय पर तेजी से आगे बढ़ेंगे।
सबसे पहले इंडिगो संकट माहौल गरम करेगा। देशभर में उड़ानें फिर रद्द हो रही हैं और देरी से यात्री तनाव में हैं। इसी बीच नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू लोकसभा में हालात पर विस्तृत अपडेट देंगे। वह सोमवार को राज्यसभा में भी संकट पर बोले। उन्होंने कहा कि इंडिगो की आंतरिक प्रणाली बिगड़ी और 1 दिसंबर की मीटिंग में कंपनी ने किसी भी समस्या का ज़िक्र नहीं किया। अगले ही दिन बड़ी संख्या में उड़ानें गिरीं और अफरा-तफरी बढ़ गई।
इसके बाद कांग्रेस सरकार पर सीधा दबाव डालेगी। सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में काम स्थगन का नोटिस दिया। वह इंडिगो संकट पर तुरंत बहस चाहते हैं। टैगोर सरकार पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए, किराए बढ़ने दिए और यात्रियों को परेशानी में छोड़ दिया।
हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। मंगलवार को भी बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कई अन्य शहरों में 200 से ज़्यादा उड़ानें रद्द हुईं। नायडू इन आंकड़ों के बीच लोकसभा में अपना पक्ष रखेंगे और स्थिति सुधारने की योजना बताएंगे।
इसके बाद माहौल राजनीति की ओर मुड़ेगा। लोकसभा में राहुल गांधी बहुप्रतीक्षित SIR बहस की शुरुआत करेंगे। दोनों सदनों ने इस चर्चा के लिए 10 घंटे तय किए हैं। कांग्रेस SIR प्रक्रिया को संदिग्ध बता रही है और मतदाता सूची में गड़बड़ियों का आरोप लगा रही है। राहुल गांधी के बाद कांग्रेस के कई नेता—केसी वेणुगोपाल, मनीष तिवारी, वर्षा गायकवाड़, मोहम्मद जावेद, उज्ज्वल रमन सिंह, ईसा खान, रवि मल्लू, इमरान मसूद, गोवाल पडावी और एस ज्योतिमणि—अपना पक्ष रखेंगे।
उधर राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह SIR चर्चा की शुरुआत कर सकते हैं। सरकार इसे पारदर्शी प्रक्रिया के तौर पर पेश करेगी, जबकि विपक्ष खामियों पर जोर देगा। यह बहस आज पूरे दिन की राजनीतिक गर्मी तय करेगी।
इसी दौरान सदन सांस्कृतिक इतिहास की ओर भी लौटेंगे। राज्यसभा वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर चर्चा आगे बढ़ाएगी। सोमवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी शुरुआत की थी। उन्होंने गीत की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका गिनाई और इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया। यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब बीजेपी कांग्रेस पर 1937 में गीत की कुछ पंक्तियाँ हटाने और “विभाजन के बीज” बोने का आरोप लगा चुकी है।
आज संसद का हर मुद्दा तेज़ी से बदलता रहेगा। इंडिगो संकट तात्कालिक चिंता लाएगा, SIR बहस राजनीतिक संघर्ष को गहरा करेगी और वंदे मातरम् पर विमर्श भावनात्मक रंग जोड़ेगा। दिन लंबा है और हर बहस नया मोड़ ला सकती है।
