पाकिस्तान ने यूके से गुमराह करने वाले गिरोह के दोषियों की वापसी के बदले मांगे राजनीतिक विरोधी

0
paki

पाकिस्तान ने इस हफ्ते ब्रिटेन के साथ एक नया कूटनीतिक विवाद शुरू कर दिया। उसने एक ऐसा प्रस्ताव रखा, जिसने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया। पाकिस्तान चाहता है कि ब्रिटेन पाकिस्तानी मूल के दोषी ग्रूमिंग गैंग अपराधियों को वापस भेजे। इसके बदले में वह ब्रिटेन से अपने दो राजनीतिक विरोधियों को सौंपने की मांग कर रहा है।

सबसे पहले, यह प्रस्ताव तब सामने आया जब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने 4 दिसंबर को इस्लामाबाद में ब्रिटिश हाई कमिश्नर जेन मैरियट से मुलाकात की। आधिकारिक बयानों में सुरक्षा सहयोग, फेक न्यूज़ और अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की चर्चा दर्ज हुई। हालांकि, ग्रूमिंग गैंग अपराधियों का ज़िक्र नहीं मिला। फिर भी, अमेरिकी पोर्टल ड्रॉप साइट न्यूज़ ने दावा किया कि असल बातचीत इस विवादित सौदे पर केंद्रित थी।

अब बात करते हैं प्रस्ताव के मुख्य हिस्से की। पाकिस्तान कह रहा है कि वह रोचडेल ग्रूमिंग गैंग के दोषियों — क़ारी अब्दुल रऊफ और आदिल खान — को स्वीकार करेगा। ब्रिटेन पहले ही इनकी नागरिकता रद्द कर चुका है, और दोनों ने पाकिस्तानी नागरिकता छोड़कर खुद को “स्टेटलेस” बना लिया था। इस वजह से उनका निर्वासन वर्षों से अटका हुआ था।

इसके बाद, पाकिस्तान ने शर्त रखी कि अगर ब्रिटेन इन दोनों अपराधियों को वापस भेजना चाहता है, तो उसे दो पाकिस्तानी राजनीतिक असंतुष्टों — शहज़ाद अकबर और आदिल राजा — को इस्लामाबाद को सौंपना होगा। ये दोनों 2022 से ब्रिटेन में निर्वासन में रह रहे हैं और जनरल असीम मुनीर–शहबाज़ शरीफ की सरकार के मुखर आलोचक हैं।

अब सवाल उठता है: ब्रिटेन पर दबाव क्यों है?
ब्रिटेन की केयर स्टारमर सरकार पर पिछले दो साल से भारी दबाव है। ग्रूमिंग गैंग कांड में पाकिस्तानी मूल के दोषियों की भूमिका ने ब्रिटिश समाज को हिला दिया। अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने भी इस मुद्दे को बार-बार उठाया और दावा किया कि “यूके में साढ़े दो लाख बच्चे ऐसे अपराधों के शिकार हुए।” ग्रूमिंग गैंग मामलों ने ब्रिटेन की राजनीति और पुलिसिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े किए। ऐसे में जनता चाहती है कि दोषियों को देश से निकालकर पाकिस्तान भेजा जाए।

लेकिन अब पाकिस्तान इस मुद्दे को कूटनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
ड्रॉप साइट न्यूज़ के मुताबिक पाकिस्तान इन अपराधियों को “अवैध रूप से रहने वाले पाकिस्तानी” की श्रेणी में दिखाना चाहता है। इसके साथ ही वह ब्रिटेन से अकबर और राजा को सौंपने पर जोर दे रहा है। गृह मंत्री नक़वी ने मीटिंग में कहा कि पाकिस्तान विदेश में बैठकर “राज्य संस्थाओं” पर की जाने वाली आलोचना बर्दाश्त नहीं करेगा।

आगे बढ़ते हैं आलोचनाओं की ओर।
मानवाधिकार संगठनों ने इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने कहा कि पाकिस्तान “ट्रांसनेशनल रेप्रेशन” यानी सीमापार दमन कर रहा है। उसने बताया कि आदिल राजा को बिना वकील, बिना सुनवाई और अनुपस्थिति में कोर्ट-मार्शल कर 14 साल की सजा दी गई। ऐसे में ब्रिटेन के लिए उन्हें पाकिस्तान को सौंपना गंभीर नैतिक संकट पैदा करेगा।

इसके अलावा, पाकिस्तान और ब्रिटेन के बीच कोई औपचारिक प्रत्यर्पण संधि नहीं है। हालांकि, ब्रिटेन का Extradition Act 2003 “ऐड-हॉक” व्यवस्था की अनुमति देता है। फिर भी, बिना कानूनी फ्रेमवर्क के यह सौदा विवाद को और गहरा करेगा।

अब पृष्ठभूमि पर आते हैं।
पाकिस्तानी मूल के ग्रूमिंग गैंग 1990 के दशक से ब्रिटेन के कई शहरों में सक्रिय थे। रॉदरहम, रोचडेल, टेलफर्ड और ओल्डहम में कमजोर नाबालिग लड़कियों को फुसलाया गया, तस्करी की गई और सामूहिक हिंसा का शिकार बनाया गया। कुछ पीड़िताओं को एक रात में 30–40 पुरुषों द्वारा प्रताड़ित किया गया। इस अपराध ने ब्रिटेन में जातीय और राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया।

अंततः, यह कथित सौदा ब्रिटेन और पाकिस्तान दोनों के सामने नए सवाल खड़े करता है।
पाकिस्तान अपने आलोचकों को चुप कराने के लिए इन अपराधियों का उपयोग करना चाहता है। दूसरी ओर, ब्रिटेन अपराधियों को निर्वासित करना चाहता है, लेकिन मानवाधिकार मुद्दों के कारण वह पाकिस्तान के प्रस्ताव पर तुरंत सहमती नहीं दे सकता।

अंत में, यह विवाद दोनों देशों की राजनीति, कूटनीति और मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं को एक टकराव की दिशा में ले जा रहा है। बातचीत आगे बढ़ेगी, लेकिन यह साफ है कि यह सौदा जितना सरल दिखता है, उतना है नहीं।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *