सबसे पहले, यह समझना जरूरी है कि यह पुतिन की दिसंबर 2021 के बाद पहली भारत यात्रा है। उनकी यह यात्रा 24 घंटे से थोड़ी लंबी होगी। दोनों नेता कल यानी 5 दिसंबर को वार्षिक भारत–रूस शिखर सम्मेलन के दौरान सीमित दायरे की बातचीत और फिर विस्तृत प्रतिनिधि-स्तर की बैठकें करेंगे।
मोदी आज जिन डिनर की मेजबानी कर रहे हैं, वह बीते साल जुलाई में मॉस्को में हुए निजी डिनर का जवाब है। तब पुतिन ने मोदी को अपने आवास पर आमंत्रित किया था। आज की मुलाक़ात भी उसी व्यक्तिगत भरोसे और रिश्ते का हिस्सा है। दोनों नेता इस शांत माहौल में द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और बदलते वैशिक परिदृश्य पर खुलकर बात करेंगे।
इसके बाद, 5 दिसंबर की सुबह पुतिन राष्ट्रपति भवन पहुँचेंगे। मोदी उन्हें औपचारिक स्वागत और तीनों सेनाओं की गार्ड ऑफ ऑनर देंगे। पुतिन फिर राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे। उसके बाद हैदराबाद हाउस में बातचीत का दूसरा दौर शुरू होगा, जिसमें व्यापार, कृषि, शिक्षा और निवेश पर कई समझौते अंतिम रूप लेंगे।
इसी दौरान, दोनों नेता भारत के FICCI और रूस के Roscongress द्वारा आयोजित एक बड़े व्यापारिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। यह मंच भारत–रूस व्यापार को संतुलित करने के लिए अहम माना जा रहा है। पिछले वर्ष दोनों देशों का व्यापार 68 अरब डॉलर तक पहुँचा, लेकिन भारत का निर्यात 5 अरब डॉलर से भी कम रहा। इसलिए भारत अब रूसी बाज़ार में दवाओं, मशीनरी, कृषि उत्पादों और कपड़ा उद्योग की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है।
शाम को पुतिन भारतीय दर्शकों के लिए रूसी सरकारी चैनल RT के भारतीय संस्करण का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनके सम्मान में भोज देंगी, जहाँ दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
इसी बीच, दोनों देशों के रक्षा संबंधों में भी तेजी दिख रही है। रूस की संसद—डूमा—ने मंगलवार को RELOS समझौते को मंजूरी दी। यह समझौता दोनों देशों की नौसेना और वायुसेना को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और लॉजिस्टिक सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति देता है। यह समझौता अमेरिका के साथ भारत द्वारा किए गए LEMOA जैसा है। इससे संयुक्त अभ्यास और मानवीय अभियानों में बड़ा लाभ मिलेगा।
रूस ने यह भी संकेत दिया कि S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, Su-57 फाइटर जेट और छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर जैसे अहम विषय भी एजेंडे में रहेंगे। भारत इन क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग चाहता है।
अंत में, मोदी–पुतिन मुलाक़ात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया नए भू-राजनीतिक बदलावों से गुजर रही है। दोनों नेता आज की बातचीत से भारत–रूस रिश्तों की अगली दिशा तय करेंगे।