इंडिगो ने गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बड़े पैमाने पर अव्यवस्था का सामना किया। हालांकि कंपनी हालात संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन देशभर के कई बड़े एयरपोर्ट पर हालात और बिगड़ गए। इसी दौरान उड़ानें लेट हुईं, कई रद्द हुईं और यात्रियों की भीड़ ने टर्मिनलों को ठसाठस भर दिया।
सबसे पहले, बुधवार को एयरलाइन ने माना कि उसके नेटवर्क में भारी दबाव बना। उसने तकनीकी दिक्कतें, खराब मौसम, बढ़ती एयर-ट्रैफिक भीड़ और नवंबर से लागू हुए नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को बड़ी वजह बताया। इन नए नियमों ने पायलटों को अधिक आराम का समय दिया, लेकिन इसके चलते उनकी उपलब्धता घट गई। इस कमी ने इंडिगो के संचालन पर सीधा असर डाला।
गुरुवार की शुरुआत के साथ ही चुनौतियाँ और बढ़ गईं। दिल्ली एयरपोर्ट पर 30 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं। वहीं, बेंगलुरु एयरपोर्ट ने 73 रद्द उड़ानों की पुष्टि की। इसके बाद, हैदराबाद एयरपोर्ट के सूत्रों ने बताया कि दिन भर में लगभग 33 आउटगोइंग और 35 इनकमिंग उड़ानें प्रभावित होंगी। मुंबई और कोलकाता में भी कई उड़ानें रद्द होने की आशंका बनी रही।
इसी बीच, देशभर के टर्मिनल यात्रियों की भीड़ से ठसाठस भर गए। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आए जिनमें थके हुए यात्री जमीन पर बैठे दिखे। कई लोग घंटों लाइनों में खड़े रहे और एयरलाइन से स्पष्ट जानकारी माँगते रहे। एक यात्री ने बताया कि वह हैदराबाद एयरपोर्ट पर 12 घंटे से इंतजार कर रहा है। एक अन्य यात्री ने लिखा कि उसकी उड़ान 22 घंटे तक लेट हुई और एयरलाइन ने कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी। किसी ने इसे “लो-की हैरसमेंट” कहा और शिकायत की कि आखिरी मिनट में उड़ानें रद्द करना उनके लिए बेहद मुश्किल हालात पैदा करता है।
इसी दौरान, इंडिगो ने कहा कि “ऑपरेशनल कारणों” से देरी और रद्दीकरण जारी हैं। हालांकि, उद्योग के जानकारों ने साफ किया कि नए FDTL नियम ही संकट की मुख्य वजह हैं। DGCA द्वारा जारी इन नियमों में 48 घंटे का साप्ताहिक आराम, बढ़े हुए नाइट ऑवर्स और रात में सिर्फ दो लैंडिंग की सीमा शामिल है। इन बदलावों का उद्देश्य पायलटों की थकान कम करना है, लेकिन ये बदलाव शेड्यूलिंग को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।
नतीजतन, इंडिगो की उड़ानें लगातार प्रभावित हो रही हैं और हजारों यात्री अपनी मंजिलों तक पहुँचने के लिए परेशान हो रहे हैं। इसके अलावा, देरी का सिलसिला एक-दूसरे से जुड़कर बड़े व्यवधान में बदल रहा है, खासकर ऐसे समय में जब देश के एयरपोर्ट पहले ही सर्द मौसम और भारी ट्रैफिक का सामना कर रहे हैं।
अंत में, इंडिगो को तेज़ी से अपने क्रू की उपलब्धता बढ़ानी होगी और यात्रियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करना होगा। उद्योग भी उम्मीद कर रहा है कि एयरलाइन और नियामक मिलकर इस नई व्यवस्था में संतुलन लाएँगे। फिलहाल, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कठिन दौर में है और यात्रियों को राहत मिलने में अभी कुछ समय लग सकता है।