रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को नई दिल्ली पहुंचेंगे। अगले दिन वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक भारत-रूस शिखर वार्ता में बैठेंगे। रूस–यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली ऐसी बैठक होगी। इस यात्रा से दोनों देश फिर से उच्च-स्तरीय संवाद को गति देना चाहते हैं।
सबसे पहले, दोनों पक्ष रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर देंगे। रूस ने हाल ही में एक अहम रक्षा समझौते को मंजूरी दी। यह कदम बताता है कि मॉस्को भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना चाहता है। इसके अलावा, दोनों देश यूएस प्रतिबंधों से प्रभावित व्यापार को सुरक्षित बनाने की कोशिश करेंगे।
इसी बीच, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने साफ कहा कि रूस भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाने के लिए नई संरचनाएं बनाना चाहता है। यह संकेत देता है कि दोनों देश ऊर्जा, रक्षा और बैंकिंग चैनलों को मजबूत करने के उपाय खोज रहे हैं।
इसके बाद, दोनों देश परमाणु ऊर्जा में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर भी बातचीत करेंगे। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को विविध बनाना चाहता है। रूस इस क्षेत्र में तकनीकी और रणनीतिक सहयोग देने के लिए तैयार है।
इसके साथ ही, भारत इस बैठक का उपयोग अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” को दोहराने के लिए करेगा। अमेरिका भारत पर रूसी ऊर्जा और रक्षा खरीद कम करने का दबाव डालता रहा है। हालांकि, नई दिल्ली अपने स्वतंत्र विदेश-नीति विकल्पों को महत्व देता है। इसलिए वह मॉस्को के साथ रक्षा और आर्थिक रिश्ते बहाल करना चाहता है।
आगे बढ़ते हुए, दोनों पक्ष कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों की आवाजाही पर बनी नई व्यवस्था को लागू करने पर काम करेंगे। यह समझौता भारतीय पेशेवरों के लिए रूस में अवसर बढ़ाएगा। इसके अलावा, पिछले सप्ताह भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत शुरू हुई। यह वार्ता भारतीय निर्यात पर लगने वाली टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अंत में, रूस की संसद ने हाल ही में RELOS समझौते को मंजूरी दी। यह समझौता दोनों सेनाओं को लॉजिस्टिक सपोर्ट साझा करने की सुविधा देता है। स्टेट डूमा के स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोडिन ने कहा कि भारत-रूस के रिश्ते व्यापक और रणनीतिक हैं, और नया अनुमोदन इन संबंधों को और मजबूती देगा।
कुल मिलाकर, पुतिन की यह यात्रा रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक तालमेल के नए रास्ते खोलेगी। दोनों देशों के रिश्ते बदलती वैश्विक राजनीति के बीच नई दिशा लेने जा रहे हैं।