चक्रवात ‘दितवा’ का कहर: श्रीलंका में 334 मौतें, तमिलनाडु में भारी बारिश का अलर्ट

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चक्रवात दितवा ने सोमवार को दक्षिण भारत और श्रीलंका दोनों में हालात बिगाड़ दिए। हालांकि सिस्टम अब गहरे अवदाब में बदल गया है, लेकिन इसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि दितवा सुबह तक बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी में ही केंद्रित रहा और उत्तर तमिलनाडु व पुडुचेरी तट से करीब 30 किलोमीटर दूर रहा। विभाग ने साफ कहा कि सिस्टम तट को पार नहीं करेगा और समुद्र के समानांतर आगे बढ़ेगा।

इसके बावजूद, मौसम में तेज बदलाव दिखा। सबसे पहले, विभाग ने तिरुवल्लूर, रानीपेट, कांचीपुरम, चेन्नई, चेंगलपट्टू और वेल्लोर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया। इसके बाद, तिरुपत्तूर, तिरुवन्नामलाई, विलुप्पुरम और पुडुचेरी में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई। साथ ही, विभाग ने चेतावनी दी कि उत्तर तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय इलाकों में 60–70 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं, जो झोंकों में 80 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती हैं, हालात बिगाड़ सकती हैं।

इधर, तमिलनाडु में चक्रवात से जुड़े हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री के.के.एस.एस.आर. रामचंद्रन ने कहा कि सरकार सभी प्रभावित इलाकों पर करीबी नजर रखे हुए है।

उधर, श्रीलंका में दितवा ने विनाश की भयावह तस्वीर छोड़ दी। चक्रवात ने वहां 334 लोगों की जान ले ली और लगभग 370 लोग लापता हैं। करीब 20,000 घर पूरी तरह नष्ट हो गए और 1 लाख से अधिक लोग सरकारी शिविरों में पहुंच चुके हैं। वहां राहत कार्य तेज करने के लिए भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत मानवीय सहायता भेजी। साथ ही, वायुसेना ने दो विशेष उड़ानों से 400 से अधिक भारतीयों को कोलंबो से वापस लाया।

इस बीच, आईएमडी महानिदेशक एम. मोहित पट्रा ने बताया कि दितवा भारतीय तट को पार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हवा की रफ्तार भले सामान्य लगे, लेकिन इसका असर खेतों पर भारी पड़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव का खतरा भी बढ़ सकता है।

तमिलनाडु सरकार ने एहतियात के तौर पर 38 आपदा प्रतिक्रिया टीमें—एसडीआरएफ और एनडीआरएफ मिलाकर—तैनात कर दी हैं। इसके अलावा, अन्य राज्यों से आई 10 अतिरिक्त टीमें भी राहत और पुनर्वास कार्य में जुट गई हैं।

अंत में, यह भी ध्यान देने योग्य है कि दितवा नाम यमन ने सुझाया था। यह सोकोट्रा के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित देतवा लैगून, एक बड़े खारे लैगून, से प्रेरित माना जाता है।

कुल मिलाकर, दितवा भले कमजोर हो गया हो, लेकिन इससे जुड़ा खतरा अभी कम नहीं हुआ है। मौसम विभाग और राज्यों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


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