गवास्कर का कड़ा बयान: “भारत पर उंगली उठाना बंद करो, पिच बहस में दोहरे मापदंड साफ दिखते हैं”
क्रिकेट जगत ने एक बार फिर पिच बहस को लेकर गर्मी महसूस की। इस बार सुनील गवास्कर ने सीधा हमला बोला। उन्होंने दोहरे मापदंडों की बात कही और दुनिया के कई विशेषज्ञों को कठघरे में रख दिया। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया पहले एशेज टेस्ट के बाद दी। यह मैच पर्थ में दो दिनों में खत्म हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को आठ विकेट से हराया। मैच में छह सेशन में 32 विकेट गिरे। केवल एक बार किसी टीम ने 200 का आंकड़ा छुआ। वह भी ऑस्ट्रेलिया ने अपनी आखिरी पारी में किया।
गवास्कर ने कहा कि पर्थ की पिच पर किसी ने सवाल नहीं उठाया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले हफ्ते कोलकाता टेस्ट पर भारी आलोचना हुई। भारत और दक्षिण अफ्रीका का मुकाबला ढाई दिन में खत्म हुआ। माइकल वॉन, चेतेश्वर पुजारा और अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों ने ईडन गार्डन्स पर सवाल उठाए। लेकिन पर्थ पर कोई आवाज नहीं उठी। उन्होंने कहा कि इस चुप्पी में ही असली समस्या छिपी है।
इसके बाद गवास्कर ने दोनों पिचों का अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि पर्थ की पिच खेल के साथ बेहतर होती गई। वहीं ईडन में शुरुआत से ही गेंद असमान उछाल दिखाती रही। उन्होंने कहा कि इस फर्क को देखकर भी आलोचकों ने कोई संतुलित बात नहीं कही। उन्होंने आगे कहा कि इस बहस में न्याय की कमी दिखती है।
गवास्कर ने सिडनी टेस्ट का भी जिक्र किया। इस मैच में इस साल की शुरुआत में पहले दिन 15 विकेट गिरे। उन्होंने कहा कि वहां भी किसी ने पिच पर कटाक्ष नहीं किया। उन्होंने लिखा कि पिछले साल भी पर्थ में पहले दिन 17 विकेट गिरे। वहां भी किसी ने पिच की आलोचना नहीं की। उन्होंने कहा कि यह दोगलापन साफ नजर आता है।
उन्होंने यह सवाल उठाया कि पर्थ के क्यूरेटर “यह ऑस्ट्रेलिया है, यहां उछाल मिलेगा” कहकर बच जाते हैं। लेकिन भारत में टर्न मिलते ही आलोचक लंबी सूची लेकर खड़े हो जाते हैं। गवास्कर ने कहा कि अगर कोई बाउंस पर शिकायत करता है, तो खबर मिलती है कि वह तेज गेंदबाजी नहीं खेल सकता। फिर जब भारत में स्पिन मिलती है, तो यह तर्क क्यों नहीं मिलता कि विरोधी टीम स्पिन नहीं खेल सकती?
इस बीच अश्विन और आकाश चोपड़ा ने भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ विशेषज्ञ केवल उपमहाद्वीप की पिचों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने इसे पुरानी मानसिकता बताया। गवास्कर ने यह मुद्दा भी उठाया कि विदेशी अम्पायर की गलती मानव त्रुटि कहलाती है। लेकिन एशियाई अम्पायर की गलती तुरंत “चीटिंग” कही जाती है।
उन्होंने कहा कि अब समय बदल गया है। अब भारत के पूर्व खिलाड़ी सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत की पिचों पर उंगली उठाते हैं, वे खुद तीन उंगलियों से घिरे खड़े होते हैं।
अंत में गवास्कर ने कहा, “अब भारत पर उंगली उठाना बंद करो। क्रिकेट एक जैसा सम्मान चाहता है। दोहरे मापदंड नहीं।”
