नई दिल्ली – दिल्ली में एक 16 वर्षीय छात्र की आत्महत्या ने राजधानी को हिला दिया। कक्षा 10 के इस छात्र ने मंगलवार को पश्चिम दिल्ली के एक मेट्रो स्टेशन से कूदकर जान दी। उसने अपने बैग में छोड़े गए नोट में शिक्षकों और हेडमिस्ट्रेस पर लगातार प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। यह मामला जल्द ही दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में बढ़ती मानसिक दबाव की चिंताओं के केंद्र में आ गया।
जैसे ही मामला सामने आया, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। अधिकारियों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 107 और 3(5) के तहत स्कूल स्टाफ पर केस दर्ज किया। स्कूल ने तीन शिक्षकों और हेडमिस्ट्रेस को निलंबित किया। इसी बीच, दिल्ली सरकार ने संयुक्त निदेशक हर्षित जैन की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय जांच समिति बनाई। समिति को तीन दिनों में अपनी रिपोर्ट देनी है।
पृष्ठभूमि और बड़ा चित्र
घटना में पाँच बड़े खुलासे सामने आए। पहला खुलासा यह है कि छात्र महीनों से ‘टार्गेटेड हैरेसमेंट’ झेल रहा था। परिवार और दोस्तों ने बताया कि स्कूल ने चेतावनी संकेतों को अनदेखा किया। जांच दल अब स्कूल और मेट्रो दोनों जगहों के सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से समीक्षा कर रहा है। अधिकारी पहले ही कई छात्रों से बात कर चुके हैं और आगे और बयान दर्ज करेंगे।
दूसरा खुलासा बताता है कि छात्र ने पहले ही अपने आत्मघाती विचारों के बारे में स्कूल काउंसलर को बताया था। पिता ने कहा कि बेटे ने यह बात कभी परिवार को नहीं बताई, लेकिन दोस्तों ने बताया कि काउंसलर ने उसकी बात को नज़रअंदाज़ किया। परिवार का कहना है कि यह सबसे दर्दनाक पहलू है।
तीसरा खुलासा एक सहपाठी ने किया। उसने कहा कि छात्र को शिक्षक लगातार बुली करते थे। सहपाठी ने यह भी कहा कि वे कुछ दिनों में हेडमिस्ट्रेस के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराने वाले थे। पिता ने बताया कि बेटे ने घटना से एक दिन पहले भी कहा था कि शिक्षक उसे धमका रहे हैं और अक्सर स्कूल से निकालने की चेतावनी देते हैं।
चौथा मुद्दा छात्रों ने उठाया। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि स्कूल मामूली बातों पर भी माता-पिता को बुलाता है। एक छात्र ने कहा कि शिक्षक खुले में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं और बच्चों को डांटकर चुप करा देते हैं। पीड़ित के पिता को भी तीन महीने पहले केवल “कक्षा में बात करने” जैसे मामूली कारण से बुलाया गया था।
पाँचवाँ और सबसे भावुक खुलासा सीसीटीवी फुटेज से सामने आया। फुटेज में छात्र पहले प्लेटफॉर्म पर खड़ी एक महिला का मार्गदर्शन करता दिखा। उसके बाद वह गार्ड के पास गया। जैसे ही गार्ड दूसरी तरफ देखता है, छात्र कूद जाता है। उसके परिवार का कहना है कि इन कुछ मिनटों में वह सामान्य दिख रहा था, जैसे वह भीतर के संघर्ष को छिपाने की कोशिश कर रहा हो।
स्थिति का व्यापक असर
यह मामला एक बार फिर साफ करता है कि स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर कमी बनी हुई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि स्कूलों को बच्चों के संकेतों को तुरंत पहचानना चाहिए और प्रताड़ना तथा दबाव जैसी समस्याओं पर संवेदनशीलता से काम करना चाहिए।
दिल्ली सरकार की समिति अब जवाबदेही तय करेगी और स्कूलों के लिए सुधारात्मक कदम सुझाएगी। परिवार चाहता है कि इस घटना से सीख लेकर सिस्टम मजबूत बने और ऐसे हादसे दोबारा न हों।
जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बयान, फुटेज और दस्तावेज़ों की समीक्षा की जाएगी। दिल्ली अब इस दुखद घटना के बाद जवाब तलाश रही है।