नई दिल्ली – कांग्रेस आज नए विवाद का सामना कर रही है। शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Ramnath Goenka Lecture की सराहना की। इसके बाद पार्टी में विरोध बढ़ गया। बुधवार को संदीप दीक्षित ने थरूर पर सीधा हमला किया और पूछा कि जब वे भाजपा की रणनीतियों को बेहतर मानते हैं तो वे कांग्रेस में क्यों हैं।
दीक्षित ने कहा कि थरूर देश को ठीक से नहीं समझते। उन्होंने कहा कि अगर थरूर को लगता है कि कांग्रेस की नीतियों के उलट चलकर कोई देश का भला करता है, तो उन्हें उसी विचारधारा का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या थरूर सिर्फ इसलिए कांग्रेस में हैं क्योंकि वे सांसद हैं। इसके बाद उन्होंने थरूर को पाखंडी कहा और स्पष्ट जवाब मांग लिया।
यह विवाद मंगलवार की रात शुरू हुआ, जब थरूर ने X पर पोस्ट किया कि वे भारतीय एक्सप्रेस के निमंत्रण पर कार्यक्रम में गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने विकास के लिए “रचनात्मक अधीरता” और उपनिवेश-उपरांत सोच पर जोर दिया। थरूर ने कहा कि भाषण में आर्थिक दृष्टि और सांस्कृतिक आग्रह दोनों मौजूद थे। वे बीमारी के बावजूद कार्यक्रम में शामिल हुए।
इसके तुरंत बाद सुप्रिया श्रीनेट ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने निष्पक्ष पत्रकारिता पर एक शब्द नहीं कहा। श्रीनेट ने कहा कि मोदी विपक्ष पर लगातार हमले करते हैं और सच बोलने वालों से असहज रहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के भाषण में कुछ भी प्रशंसा योग्य नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री कांग्रेस को लेकर 24 घंटे चिंतित रहते हैं और थरूर को यह बात समझनी चाहिए।
इसी बीच पृष्ठभूमि में एक और बड़ा पहलू सामने आया। छठे Ramnath Goenka Lecture में प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार चुनाव परिणाम पर बात की। उन्होंने कहा कि जनता ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि विकास ही राजनीति का भविष्य तय करेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव मोड में नहीं, बल्कि “भावनात्मक मोड” में रहती है और 24×7 जनता के लिए काम करती है।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर फिर हमला किया। उन्होंने कहा कि नक्सल और माओवादी विचारधाराओं को समर्थन देने वाले समूह देश में कमजोर हो रहे हैं, लेकिन कांग्रेस में मजबूत हो रहे हैं।
पार्टी के भीतर यह आग पहली बार नहीं लगी। इससे पहले थरूर ने वंशवाद को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया और योग्यता-आधारित राजनीति का समर्थन किया। भाजपा ने उस बयान का स्वागत किया था और इसे भारतीय राजनीति की सच्चाई बताने वाला विचार कहा था।
कांग्रेस अब अंदरूनी मतभेदों से जूझ रही है। पार्टी नेतृत्व थरूर के बयानों को अनुशासनहीनता मानता है। जबकि थरूर खुली चर्चा की वकालत करते हैं। आज का विवाद कांग्रेस की उस गहरी खाई को फिर उजागर करता है, जिसे पार्टी लंबे समय से भर नहीं पा रही है।