पीयूष गोयल बोले: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता संतुलित हुआ तो मिलेगी “बहुत अच्छी खबर”

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नई दिल्ली – दिल्ली में मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं। साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे ही बातचीत संतुलित और न्यायसंगत रूप लेगी, देश को “बहुत अच्छी खबर” मिलेगी।

उन्होंने यह बात इंडो-अमेरिकन चेंबर ऑफ कॉमर्स (IACC) द्वारा आयोजित 22वें इंडो-यूएस इकोनॉमिक समिट में कही। उन्होंने शुरुआत में ही माहौल स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध मजबूत हैं। उन्होंने जोड़ा कि दोनों देशों के बीच कोई रुकावट या दूरी नहीं है। इसके बजाय, उन्होंने इस रिश्ते को “बहुत रणनीतिक” और “बहुत अहम” बताया।

इसके बाद उन्होंने पृष्ठभूमि समझाई। पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया था कि व्यापार समझौते में तेजी आ रही है। उन्होंने 10 नवंबर को कहा था कि दोनों देश एक नया, बेहतर समझौता बना रहे हैं। इस बयान ने दोनों देशों की उम्मीदें बढ़ा दी थीं।

इसी बीच, कई रिपोर्टों ने दावा किया कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का पहला चरण अब लगभग तैयार है। दोनों देश वर्चुअल माध्यम से बातचीत करते हुए अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। गोयल ने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ व्यापार से बड़ा है। उन्होंने हाल ही में हुए 10 साल लंबे रक्षा समझौते का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी गहराई और भरोसे पर खड़ी है।

इसके बाद उन्होंने घरेलू उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि परिवार में भी हल्की-फुल्की नोकझोंक होती है। इसलिए व्यापार वार्ता में मतभेद होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों की रक्षा करेगा। साथ ही, किसानों, मछुआरों और छोटे उद्योगों की संवेदनशीलताओं को भी ध्यान में रखेगा। उन्होंने जोड़ा कि सही संतुलन मिलते ही सभी को सकारात्मक नतीजे मिलेंगे।

फिर उन्होंने साझेदारी की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका लोकतंत्र और विविधता जैसे साझा मूल्यों पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को भरोसेमंद भागीदार मानता है। दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इसके बाद उन्होंने एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि का उल्लेख किया। कुछ दिनों पहले ही भारत ने अमेरिका से हर साल 2.2 मिलियन टन LPG आयात करने का लंबा समझौता किया है। यह सौदा ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देगा।

घरेलू मोर्चे पर उन्होंने पिछले 10-12 वर्षों की भारतीय प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत “फ्रैजाइल फाइव” से निकलकर दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि भारत 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उन्होंने इस वृद्धि का श्रेय मजबूत बैंकिंग व्यवस्था, कम महंगाई, नियंत्रित घाटे और बड़े पैमाने पर हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को दिया।

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था हर आठ साल में दोगुनी हो रही है और 2047 तक 30-35 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य हासिल कर सकती है। वैश्विक अस्थिरता के बीच उन्होंने भारत को “स्थिरता का नखलिस्तान” कहा। उन्होंने बताया कि भारतीय शेयर बाजार 11 साल में साढ़े चार गुना बढ़ा है। भारत में 2,000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर चल रहे हैं, जिनमें कई अमेरिकी कंपनियां शामिल हैं।

अंत में, उन्होंने सरकार की नई पहलें गिनाईं—10,000 करोड़ रुपये का दूसरा फंड ऑफ फंड्स और 1 लाख करोड़ रुपये का नया अनुसंधान एवं नवाचार कोष। उन्होंने कहा कि ये कदम भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में और मजबूत बनाएंगे।


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