एक बार फिर एनडीए सरकार, इस बार 200 के पार

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पटना: बिहार में शुक्रवार को वोटों की गिनती ने राजनीति की दिशा बदल दी। एनडीए ने शुरुआत से ही तेज रफ्तार पकड़ी और देखते-देखते बढ़त 200 सीटों के करीब पहुँचा दी। सुबह 8 बजे जैसे ही गिनती शुरू हुई, पोस्टल बैलेट ने एनडीए को बढ़त दिला दी। इसके बाद हर राउंड में एनडीए ने अपना फासला बढ़ाया।

इधर महागठबंधन लड़खड़ाता दिखा। तेजस्वी यादव की आरजेडी पिछड़ गई। कांग्रेस और नीचे चली गई। 2020 के मुकाबले इस बार का प्रदर्शन बेहद कमजोर नजर आया। उधर, कभी “X-फैक्टर” मानी जा रही जन सुराज पार्टी पूरा दिन जमीन नहीं पकड़ सकी।

बीजेपी और जेडीयू का अंदरूनी मुकाबला भी दिलचस्प रहा। बीजेपी शुरू से आगे निकलती दिखी, इसलिए “बिग ब्रदर” की भूमिका उसी के हाथ में जाती दिखी। जेडीयू भी मजबूत प्रदर्शन करती रही और 80 से ज्यादा सीटों पर आगे बढ़ती गई। चिराग पासवान की एलजेपी (RV) ने भी सभी को चौंकाया। 20 से ज्यादा सीटों पर बढ़त ने उन्हें नई ताकत दे दी। जीतन राम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम को भी शुरुआती बढ़त मिली।

महागठबंधन की ओर से आरजेडी ही दो अंकों में दिखी। कांग्रेस 60 से ज्यादा सीटों पर लड़ने के बावजूद पाँच सीटों पर ही सिमटती दिखी। वामदलों को भी सिर्फ कुछ सीटों पर शुरुआती बढ़त मिली। तेज प्रताप महुआ में पिछड़ते गए, जबकि राघोपुर में तेजस्वी का मुकाबला शुरू से ही उलझा हुआ रहा।

इन नतीजों के बीच नितीश कुमार फिर केंद्र में आ गए। चुनाव शुरू होने से पहले जिनकी राजनीतिक सेहत पर सवाल उठ रहे थे, वे अब फिर मुख्यमंत्री बनने की तैयारी में हैं। उनकी “सुशासन” छवि और महिलाओं के भारी मतदान ने जेडीयू को राहत दी। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आक्रामक प्रचार चलाया और “जंगल राज” बनाम “सुशासन” की लड़ाई को तेज किया। यह रणनीति एनडीए के लिए निर्णायक साबित होती दिखी।

सीमांचल में भी एनडीए को बढ़त मिली। बीजेपी ने घुसपैठ और सुरक्षा के मुद्दे जोर-शोर से उठाए। यहाँ यह संदेश काम करता दिखा। दूसरी तरफ, आरजेडी का जातीय संतुलन गड़बड़ाया। कई वादे लोगों को अव्यावहारिक लगे। इसका सीधा नुकसान तेजस्वी यादव की छवि और महत्वाकांक्षा को हुआ।

अगर अंतिम नतीजे शुरुआती रुझानों जैसे रहे, तो एनडीए का यह “निमो” (नितीश + मोदी) वाला समीकरण बिहार में रिकॉर्ड जीत दर्ज करेगा। नितीश कुमार 10वीं बार शपथ ले सकते हैं। साथ ही बीजेपी की बढ़त आगे सत्ता संतुलन में नई भूमिका तय करेगी।

बिहार की राजनीति एक बार फिर घूम चुकी है — और पटना ने आज यह पल सामने से देखा।


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