पटना – बिहार विधानसभा चुनाव की गिनती ने शुक्रवार सुबह एक पारिवारिक राजनीतिक संघर्ष को तेज कर दिया। लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे—तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव—अलग-अलग मोर्चों से चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि शुरुआती रुझानों में दोनों ही पिछड़ते दिखे।
सुबह दूसरे राउंड के बाद तेजस्वी राघोपुर से 1,000 से ज्यादा वोटों से पीछे चले गए। यह सीट लालू परिवार का परंपरागत गढ़ मानी जाती है। वहीं तेज प्रताप महुआ से भारी अंतर से पीछे हो गए। तीसरे राउंड में महुआ से आए आंकड़ों में एलजेपी (रामविलास) के संजय कुमार सिंह को 10,301 वोट मिले, जबकि जे-जेडी के तेज प्रताप को सिर्फ 1,500 वोट मिले। आरजेडी उम्मीदवार मुकेश रोशन 6,781 वोटों पर थे। इस तरह तेज प्रताप लगभग 9,000 वोटों से पिछड़ गए।
यह स्थिति 2020 से बिल्कुल अलग है, जब तेज प्रताप ने हसनपुर से 20,000 से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। इस बार कहानी उलटती नजर आ रही है।
तेज प्रताप की यह मुश्किलें मई में शुरू हुईं जब लालू प्रसाद यादव ने उन्हें छह साल के लिए आरजेडी से निष्कासित कर दिया। आरोपों में “गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार” और “परिवारिक मूल्यों पर खरा न उतरना” शामिल था। विवाद एक कथित फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ, जिसकी तेज प्रताप ने बाद में सफाई दी कि उनका अकाउंट हैक हुआ था।
निष्कासन के बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल (जे-जेडी) बनाया और पांच छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन किया। उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक नई शुरुआत बताया, लेकिन रुझान बताते हैं कि यह कदम उन्हें भारी पड़ रहा है।
उधर तेजस्वी यादव, महागठबंधन के सीएम चेहरे, हल्की बढ़त के बाद भी मुश्किल लड़ाई लड़ते दिख रहे हैं। 893 वोटों की मामूली बढ़त उन्हें राघोपुर में कोई बड़ा आराम नहीं दे रही।
गिनती का माहौल दोनों भाइयों के लिए दो अलग राहें बना रहा है—एक तरफ परिवार से अलग होकर नई पहचान की कोशिश करता तेज प्रताप, और दूसरी ओर विपक्ष की सबसे बड़ी उम्मीद बने तेजस्वी।
चुनावी माहौल में तेज प्रताप आत्मविश्वास जताते रहे। उन्होंने कहा था, “मुझे एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं है। 14 नवंबर को क्या होगा, देखते हैं। हम जश्न की नहीं, काम की तैयारी करते हैं।” लेकिन रुझान बताते हैं कि यह मुकाबला उनके लिए कहीं ज्यादा कठिन साबित हो रहा है।
अंततः यह चुनाव नतीजे सिर्फ राजनीतिक समीकरण नहीं बदलेंगे, बल्कि यादव परिवार की आंतरिक कहानी पर भी बड़ा असर डालेंगे। बिहार की जनता आज तय करेगी कि वह किस बेटे का राजनीतिक सफर आगे बढ़ते देखना चाहती है।