ट्रंप ने H1-B वीजा का समर्थन किया, बोले– “अमेरिका को विदेशी प्रतिभा की जरूरत है”

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वाशिंगटन-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दुर्लभ कदम में H1-B वीजा कार्यक्रम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश को विदेशी प्रतिभाओं की जरूरत है ताकि घरेलू कर्मचारियों की कमी पूरी हो सके। इस वीजा का अधिकतर लाभ भारतीयों को मिलता है।

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उनका प्रशासन अमेरिकी मजदूरों की मजदूरी पर असर डालने वाले H1-B कार्यक्रम को प्राथमिकता देगा, तो उन्होंने कहा, “हां, लेकिन प्रतिभा लाना जरूरी है।” इंटरव्यूअर के यह कहने पर कि “हमारे पास काफी प्रतिभाशाली लोग हैं,” ट्रंप ने तुरंत जवाब दिया, “नहीं, आपके पास नहीं हैं।”

उन्होंने कहा, “कुछ विशेष प्रतिभाएं आपके पास नहीं हैं। लोगों को सीखना पड़ता है। आप बेरोजगारों की कतार से किसी को उठाकर मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्री में नहीं लगा सकते।”

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब उनकी सरकार ने दो महीने पहले H1-B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी थी। इस फैसले से अमेरिकी प्रवासी कर्मचारियों, खासकर भारतीयों में चिंता बढ़ गई थी। यह कदम आव्रजन पर सख्ती और विदेशी कामगारों की एंट्री सीमित करने की श्रृंखला का हिस्सा था।

19 सितंबर को जारी राष्ट्रपति के आदेश में कहा गया था कि जिन H1-B कर्मचारियों के नियोक्ता ने यह फीस नहीं भरी, उन्हें अमेरिका में प्रवेश नहीं मिलेगा। हालांकि, व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट किया कि यह नियम केवल नए आवेदकों पर लागू होगा, पुराने वीजाधारकों पर नहीं।

इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने जॉर्जिया स्थित हुंडई फैक्ट्री पर हुई आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) की छापेमारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “उन्होंने अवैध प्रवासियों को निकालने के लिए छापा मारा। वहां दक्षिण कोरिया के लोग थे जो वर्षों से बैटरियां बना रहे थे। यह बहुत कठिन और खतरनाक काम है। वहां 500-600 लोग शुरुआती चरण में थे, जो बैटरी बनाना सिखा रहे थे। उन्हें देश छोड़ने को कहा गया। लेकिन अमेरिका को ऐसे लोगों की जरूरत है।”

इस छापे में 300 से ज्यादा दक्षिण कोरियाई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। इस पर सियोल सरकार ने मानवाधिकार उल्लंघन की जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी।

ट्रंप ने पिछले महीने दक्षिण कोरिया की यात्रा के दौरान कहा था कि वह इस छापे के “कड़े विरोधी” हैं। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका को तकनीकी क्षेत्र में दक्ष विदेशी विशेषज्ञों की जरूरत है ताकि उद्योगों को कुशल श्रमिक मिल सकें।


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