मेडिकल लेक्चरर से आतंकी मॉड्यूल की साज़िश तक- जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की जिम्मेदारी संभालने का आरोप

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फरीदाबाद – कभी मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर रहीं डॉ. शाहीन शाहिद अब एक बड़े आतंकी मॉड्यूल की मुख्य कड़ी बनकर सामने आई हैं। जांच एजेंसियां कहती हैं कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने उन्हें भारत में अपनी महिला शाखा जमात-उल-मोमिनीन खड़ी करने की जिम्मेदारी दी थी।

जांचकर्ताओं के अनुसार, शाहीन सीधे मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के संपर्क में थीं। सादिया पाकिस्तान में जैश की महिला शाखा की प्रमुख है। उसके पति यूसुफ अजहर 1999 के कंधार अपहरण का मास्टरमाइंड था और इस साल बहावलपुर में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मारा गया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि शाहीन सोशल मीडिया के गुप्त चैनलों से सीमा पार बैठे हैंडलरों से जुड़ी थीं। उनका लक्ष्य भारत में जैश के समर्थन नेटवर्क का विस्तार करना था।

फरीदाबाद मॉड्यूल का पर्दाफाश

डॉ. शाहीन की गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े दो डॉक्टरों — डॉ. मुजम्मिल अहमद गनाई और डॉ. उमर उ नबी — को गिरफ्तार किया। दोनों एक अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क का हिस्सा थे, जो दिल्ली लाल किला कार ब्लास्ट के बाद उजागर हुआ। इस धमाके में 10 लोग मारे गए और 20 से अधिक घायल हुए।

जम्मू-कश्मीर पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह जांच अक्टूबर के मध्य में शुरू हुई जब श्रीनगर के नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर मिले। इसी सुराग से पुलिस ने 8 नवंबर को मुजम्मिल को फरीदाबाद से पकड़ा और उसके पास से विस्फोटक व एके-47 बरामद की। पूछताछ में शाहीन का नाम सामने आया।

तीन दिन बाद 11 नवंबर को एजेंसियों ने शाहीन को गिरफ्तार किया। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने मेडिकल पेशे का इस्तेमाल शक से बचने और मॉड्यूल की लॉजिस्टिक मदद करने में किया।

लखनऊ में छापेमारी

गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने लखनऊ के लालबाग स्थित उनके घर पर छापा मारा। टीम ने मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और कई दस्तावेज जब्त किए। उनके भाई डॉ. परवेज अंसारी से भी पूछताछ हुई।

उनके पिता सैयद अहमद अंसारी ने मीडिया से कहा, “मुझे बेटी की गतिविधियों के बारे में कुछ पता नहीं था। आखिरी बार उससे एक महीने पहले बात हुई थी।”

कैरियर और गायब होना

गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज, कानपुर के रिकॉर्ड बताते हैं कि डॉ. शाहीन सिद्दीकी (शाहिद) ने 2006 में यूपीपीएससी के माध्यम से लेक्चरर पद संभाला। बाद में वह 2009 से 2010 तक कन्नौज मेडिकल कॉलेज में रहीं। 2013 में वह बिना अनुमति छुट्टी पर गईं और वापस नहीं लौटीं। राज्य सरकार ने 2021 में उनकी सेवा समाप्त कर दी।

कॉलेज के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने कहा, “वह शांत और अनुशासित थीं। उनका नाम आतंकी केस में देखकर सब हैरान हैं।” एटीएस ने अब कॉलेज से उनके सभी रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं।

जांच में पता चला कि शाहीन ने महाराष्ट्र के पेशेवर ज़फ़र हयात से शादी की थी, पर 2015 में तलाक के बाद वह फरीदाबाद चली गईं। वहां उनकी मुलाकात डॉ. मुजम्मिल और अन्य जेएम सदस्यों से हुई। सूत्रों ने बताया कि उनकी कार से पहले राइफल और जिंदा कारतूस बरामद हुए थे।

परिचितों ने उन्हें “मेधावी लेकिन अकेली रहने वाली” बताया। अब एनआईए ने केस अपने हाथ में ले लिया है और लखनऊ, कानपुर और फरीदाबाद में उनके संपर्कों और डिजिटल सबूतों की जांच शुरू कर दी है।


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