बेंगलुरु की हाई-सिक्योरिटी जेल में लग्जरी लाइफ! कैदी फोन और टीवी के साथ दिखे
बेंगलुरु – बेंगलुरु में परप्पना अग्रहरा सेंट्रल जेल एक बड़े विवाद में घिर गई है। ताज़ा वीडियो ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन वीडियो में खतरनाक कैदी मोबाइल चलाते, टीवी देखते और आराम से चाय पीते नजर आ रहे हैं।
पहला वीडियो आईएसआईएस भर्तीकर्ता जुहैब हमीद शकील मन्ना का है। वह जेल के अंदर फोन स्क्रॉल करता दिखा। उसके पीछे टीवी या रेडियो की आवाज साफ सुनाई दी। वीडियो में वह किसी से बात करता और चाय का आनंद लेता दिखा।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, जुहैब मन्ना ने कुरान सर्कल नामक ऑनलाइन समूह के जरिए युवाओं को उकसाया। उसने उन्हें कट्टरपंथी बनाया और सीरिया भेजने की साजिश रची। एनआईए ने कहा कि मन्ना ने मुस्लिम युवाओं को सीरिया में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों के वीडियो दिखाकर भड़काया।
इसी बीच एक और वीडियो ने सनसनी मचा दी। इसमें उमेश रेड्डी, जो 18 से ज्यादा बलात्कार और हत्या के मामलों में दोषी है, तीन मोबाइल फोन इस्तेमाल करते दिखा। उसके बैरक में एक टीवी सेट भी नजर आया। रिपोर्टों के मुताबिक, जेल कर्मचारी उसकी गतिविधियों से वाकिफ थे। 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी मौत की सजा को 30 साल की सज़ा में बदला था। कोर्ट ने साफ कहा था कि रेड्डी मानसिक रूप से स्वस्थ है।
तीसरे मामले में तरुण राजू, जो रान्या राव सोने की तस्करी केस में गिरफ्तार है, भी जेल के अंदर फोन चलाते और खाना बनाते दिखा। जांच एजेंसियों ने उसे इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया, जो दुबई से सोना मंगवाकर रान्या राव को सप्लाई करता था। रान्या, एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की बेटी है।
इन घटनाओं के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सख्त जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा, “जेल में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।”
जेल विभाग ने तुरंत जांच शुरू की। एडीजीपी (जेल) पीवी आनंद रेड्डी ने परप्पना अग्रहरा जेल का दौरा किया और मौके पर निरीक्षण किया। उन्होंने कैदियों, कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वीडियो 2023 और 2025 के बीच रिकॉर्ड किए गए। इनमें कैदी खुलेआम मोबाइल चलाते और बैरक में बैठकर टीवी देखते दिखे। अब जांच अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि फोन जेल में कैसे पहुंचे, किसने उन्हें दिया और ये वीडियो मीडिया तक कैसे पहुंचे।
मुख्य अधीक्षक को निर्देश मिला है कि वह परप्पना अग्रहरा थाने में अलग-अलग शिकायतें दर्ज करें और कानूनी कार्रवाई शुरू करें। साथ ही, डीआईजी (जेल, दक्षिण जोन) को विभागीय जांच कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं।
यह पूरा मामला कर्नाटक की जेल व्यवस्था पर गहरी छाप छोड़ गया है। बार-बार सामने आ रहे ऐसे वीडियो दिखाते हैं कि जेलों में अनुशासन और नियंत्रण की गंभीर कमी है। अब राज्य सरकार पर दबाव है कि वह व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए।
