इस्तांबुल वार्ता में फिर गतिरोध, पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा तनाव बढ़ा
इस्लामाबाद/काबुल – पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा तनाव के बीच शांति वार्ता एक बार फिर अटक गई। दोनों देशों के बीच हालिया संघर्षों के बाद तुर्की के इस्तांबुल में जारी वार्ता में गतिरोध गहरा गया।
शनिवार को पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तारड़ ने कहा कि वार्ता में अब कोई प्रगति नहीं हो रही। उन्होंने दावा किया कि बातचीत “डेडलॉक” पर पहुंच गई है। हालांकि, काबुल ने इस दावे की पुष्टि नहीं की।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहा कि “बातचीत खत्म हो चुकी है।” उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्षविराम तभी तक रहेगा जब तक अफगानिस्तान की ओर से कोई उल्लंघन नहीं होगा। आसिफ ने जियो न्यूज को बताया, “जैसे हम बात कर रहे हैं, वार्ता अब खत्म हो चुकी है।”
यह गतिरोध उस समय सामने आया जब एक अफगान अधिकारी ने आरोप लगाया कि सीमा झड़पों में पाकिस्तानी गोलाबारी से चार अफगान नागरिक मारे गए।
एक हफ्ते पहले हुआ था समझौता
यह स्थिति उस समझौते के ठीक एक हफ्ते बाद आई जब तुर्की ने कहा था कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों ने युद्धविराम बनाए रखने पर सहमति जताई है। इस्तांबुल बयान में कहा गया था, “सभी पक्ष संघर्षविराम जारी रखने पर सहमत हुए हैं।”
बयान में यह भी उल्लेख था कि शांति बनाए रखने के लिए एक निगरानी और सत्यापन प्रणाली बनाई जाएगी, जो उल्लंघन करने वाले पक्ष पर दंड लगाएगी। इसके क्रियान्वयन पर आगे की वार्ता 6 नवंबर को तय थी।
हालांकि, अब पाकिस्तान का कहना है कि अफगान तालिबान ने 2021 के दोहा शांति समझौते के तहत आतंकवाद पर अंकुश लगाने के अपने वादे पूरे नहीं किए।
सूचना मंत्री तारड़ ने कहा कि पाकिस्तान शांति और स्थिरता को महत्व देता है, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान किसी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेगा जो अफगान जनता या पड़ोसी देशों के हित में न हो।”
कैसे बढ़ा सीमा तनाव
अक्टूबर में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा जब काबुल में हुए विस्फोटों के लिए तालिबान ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। जवाब में तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमले किए और 58 सैनिकों को मारने का दावा किया, जबकि इस्लामाबाद ने 23 जवानों की मौत की पुष्टि की।
इसके बाद दोनों देशों ने संघर्षविराम की घोषणा की, जिसे दोनों ने एक-दूसरे की पहल बताया। लेकिन जल्द ही अफगान इलाके में हवाई हमलों की खबरें आईं, जिनमें कम से कम 10 लोगों की मौत हुई।
गुरुवार रात चमन सीमा पर दोनों ओर से गोलीबारी हुई, जिससे तनाव फिर बढ़ गया।
अब जबकि बातचीत ठप हो चुकी है, दोनों देशों के बीच शांति की उम्मीद एक बार फिर धुंधली पड़ गई है। तुर्की की मध्यस्थता के बावजूद, इस्लामाबाद और काबुल के रिश्ते लगातार अविश्वास और आरोपों से घिरे हुए हैं।
