मुंबई – महाराष्ट्र सरकार ने पुणे के मुंधवा इलाके में 1,800 करोड़ रुपये के कथित जमीन घोटाले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी एक कंपनी से संबंधित है। पंजीयन महानिरीक्षक (IGR) की अंतरिम रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
रिपोर्ट मुंबई के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई। इसमें सरकारी जमीन की बिक्री और पंजीकरण में बड़े स्तर की गड़बड़ियां दर्ज की गई हैं। सरकार ने तत्काल प्रभाव से एक अधिकारी को निलंबित किया और विशेष समिति गठित की। समिति आठ दिनों में अंतिम रिपोर्ट देगी।
300 करोड़ में बिकी 1,800 करोड़ की जमीन
रिपोर्ट के अनुसार, पुणे के मुंधवा में स्थित 43 एकड़ की सरकारी जमीन केवल 300 करोड़ रुपये में बेची गई। यह जमीन “मुंबई सरकार” के नाम पर दर्ज थी। अमीडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी नामक कंपनी ने इसे खरीदा, जो पार्थ पवार से जुड़ी बताई जा रही है।
भूमि की बाजार कीमत करीब 1,800 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह जमीन पहले भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण को 15 साल के लिए पट्टे पर दी गई थी। बाद में पट्टा 2038 तक बढ़ाया गया। किराया मात्र एक रुपये वार्षिक तय किया गया था, जिससे जमीन पर सरकार की स्वामित्व रुचि बनी रही।
फिर भी, पावर ऑफ अटॉर्नी धारक शीटल तेजवानी ने 272 व्यक्तियों की ओर से अमीडिया एंटरप्राइजेज को सीधा बिक्री कर दी। कंपनी ने इस जमीन पर डेटा सेंटर बनाने की योजना जताई।
21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी घटी सिर्फ 500 रुपये पर
जांच में सामने आया कि इस सौदे की घोषित कीमत 300 करोड़ रुपये थी, जिस पर करीब 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी देय थी। लेकिन रजिस्ट्री मात्र 500 रुपये की स्टांप ड्यूटी पर की गई।
भले ही डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को 5% स्टांप ड्यूटी छूट मिल सकती थी, फिर भी लोकल बॉडी टैक्स और मेट्रो टैक्स जैसे स्थानीय कर करीब 6 करोड़ रुपये बनते थे। इस वजह से राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ।
अधिकारी निलंबित, एफआईआर की तैयारी
अंतरिम रिपोर्ट ने तत्कालीन संयुक्त उप-पंजीयक रविंद्र तारू की बड़ी लापरवाही बताई। उन्होंने सरकारी अनुमति और एनओसी के बिना बिक्री पंजीकृत कर दी। सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है।
राज्य सरकार ने 5.99 करोड़ रुपये की बकाया स्टांप ड्यूटी वसूली का नोटिस जारी किया है। साथ ही पावर ऑफ अटॉर्नी धारक, खरीदार कंपनी और उप-पंजीयक के खिलाफ एफआईआर की तैयारी चल रही है।
सूत्रों के अनुसार, पार्थ पवार का नाम सीधे एफआईआर में शामिल नहीं है, लेकिन सौदा उनकी कंपनी से जुड़ा बताया गया है।
आठ दिन में रिपोर्ट देगी उच्चस्तरीय समिति
सरकार ने स्टांप ड्यूटी और पंजीयन विभाग के कामकाज की व्यापक जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई है। यह समिति आठ दिनों में अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेगी।
इस पूरे मामले ने राज्य सरकार में हलचल मचा दी है। वित्त विभाग ने भी राजस्व हानि का आकलन शुरू कर दिया है। जांच अधिकारी अब जमीन सौदे की वैधता, सरकारी अनुमति प्रक्रिया और लाभार्थियों के संबंधों की पड़ताल कर रहे हैं।
इस घोटाले ने एक बार फिर महाराष्ट्र की जमीन पंजीयन प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।