महिंद्रा एंड महिंद्रा ने आरबीएल बैंक से पूरी तरह की एग्जिट, 6,780 करोड़ रुपये में बेचा पूरा हिस्सा

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मुंबई – महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने गुरुवार को आरबीएल बैंक से पूरी तरह बाहर निकलने का फैसला किया। कंपनी ने बैंक में अपनी पूरी 3.5% हिस्सेदारी करीब ₹6,780 करोड़ में बेच दी। इस कदम से कंपनी को पिछले साल किए निवेश पर 62% से अधिक का रिटर्न मिला।

एमएंडएम ने यह निवेश 2023 में किया था, जब आरबीएल बैंक नियामकीय जांच और नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था। उस समय कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ अनीश शाह ने कहा था कि यह कदम समूह को वित्तीय सेवाओं और बैंकिंग क्षेत्र की गहरी समझ दिलाने के लिए है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि निवेश सात से दस साल तक रखा जाएगा, जब तक कोई रणनीतिक अवसर सामने न आए।

अब वह अवसर जल्द आ गया। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी ने सही समय पर एग्जिट का निर्णय लिया है। हाल के महीनों में आरबीएल बैंक का मूल्यांकन मजबूत हुआ है, जिससे यह सौदा कंपनी के लिए लाभकारी साबित हुआ।

इस निर्णय के साथ यह अटकलें भी खत्म हो गईं कि एमएंडएम बैंकिंग सेक्टर में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहता है। कंपनी पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि वह बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने या नियंत्रणकारी स्थिति हासिल करने की योजना नहीं बना रही है।

आरबीएल बैंक से एमएंडएम की यह हिस्सेदारी बिक्री ऐसे समय में हुई है जब बैंक को लेकर बाजार में काफी हलचल है। हाल ही में दुबई स्थित एमिरेट्स एनबीडी ने आरबीएल बैंक में 60% हिस्सेदारी खरीदने की मंशा जताई थी। यह सौदा लगभग 3 अरब डॉलर का है। अगर यह पूरा होता है, तो यह भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सबसे बड़ी सीमा-पार अधिग्रहण डील होगी।

बाजार ने इस खबर पर हल्की सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। गुरुवार सुबह एमएंडएम के शेयर करीब 1.2% बढ़े, जबकि आरबीएल बैंक के शेयरों में भी लगभग 1% की बढ़त देखी गई।

उद्योग विश्लेषक कहते हैं कि इस एग्जिट से एमएंडएम को अपने मुख्य व्यवसाय पर फिर से फोकस करने का मौका मिलेगा। कंपनी अब इलेक्ट्रिक वाहनों, ट्रैक्टरों और मोबिलिटी सेवाओं में चल रहे अपने पूंजी निवेश पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी। साथ ही, उसने इस सौदे से मजबूत वित्तीय लाभ भी दर्ज किया।

दूसरी ओर, आरबीएल बैंक के लिए यह शेयरहोल्डिंग में बदलाव एक नए संक्रमण काल की शुरुआत है। विशेषज्ञ मानते हैं कि एमिरेट्स एनबीडी के सौदे के आगे बढ़ने के बाद बैंक की रणनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।

महिंद्रा एंड महिंद्रा का यह निर्णय भारतीय कॉर्पोरेट जगत में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है—जहां कंपनियां रणनीतिक रूप से निवेश करती हैं और अवसर आने पर समय पर एग्जिट लेती हैं।


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